स्वच्छता में शीर्ष पर रहने वाले इंदौर के औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ते जल और वायु प्रदूषण पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए सख्त कदम उठाए हैं। कोर्ट के स्वतः संज्ञान के बाद, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) ने व्यापक कार्रवाई की शुरुआत कर दी है।
बिना लाइसेंस और नियमों की अनदेखी पर कड़ा प्रहार
हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जिले के 243 उद्योगों को नोटिस जारी किए हैं। ये इकाइयां बिना वैध लाइसेंस के संचालित हो रही थीं और प्रदूषण फैला रही थीं।
"अब केवल कागजी कार्रवाई नहीं होगी, इन उद्योगों की सूची बिजली कंपनी को दी गई है ताकि इनके बिजली कनेक्शन काटकर इन्हें बंद किया जा सके।"
रेड-ऑरेंज श्रेणी के उद्योगों पर कसा शिकंजा
जांच में पाया गया कि जिले में खनन, स्टोन क्रशर और रेड-ऑरेंज श्रेणी (अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले) के उद्योग सबसे बड़े दोषी हैं। हाईकोर्ट ने यह माना कि इन उद्योगों के कारण इंदौर की हवा और पानी की गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है, जो जल एवं वायु प्रदूषण निवारण अधिनियम का उल्लंघन है।
- खनन उद्योग (Mining)
- स्टोन क्रशर (Stone Crusher)
- रेड-ऑरेंज श्रेणी (Red-Orange Category)
हजारों उद्योग प्रशासन के रडार निगरानी में
हाईकोर्ट में प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, इंदौर में पंजीकृत 5,961 उद्योगों में से 1,000 से अधिक उद्योग बिना प्रदूषण विभाग की अनुमति के चल रहे हैं। प्रशासन की लंबी चुप्पी के बाद अब कोर्ट की सख्ती ने हड़कंप मचा दिया है।
कार्रवाई की प्रक्रिया
अगली सुनवाई की तैयारी
इस मामले की अगली सुनवाई 9 फरवरी को होगी। महाधिवक्ता को प्रदूषण बोर्ड की विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर जवाब प्रस्तुत करना होगा। यदि कार्रवाई संतोषजनक नहीं पाई गई, तो कोर्ट प्रशासन पर और भी सख्त कदम उठा सकता है।
| विषय | स्थिति/विवरण |
|---|---|
| वायु गुणवत्ता | खतरनाक स्तर |
| जल प्रदूषण | अधिनियम का उल्लंघन |
| कार्रवाई का आधार | हाईकोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान |
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