रहली।

रहली क्षेत्र में समर्थन मूल्य योजना के तहत खरीदी गई सरसों में बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। जांच में सामने आया कि खरीदी गई सरसों में करीब 30 से 40 प्रतिशत तक मिट्टी से बने नकली दाने मिलाए गए थे। लंबी जांच के बाद छिरारी और खैराना सहकारी समितियों के संचालकों, सर्वेयरों और वेयरहाउस के तत्कालीन शाखा प्रबंधक के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं में रहली थाने में केस दर्ज किया गया है।

 

मामले में शिकायतकर्ता रंजीत कुमार सिंह (निवासी वाराणसी, वर्तमान पता भोपाल) की शिकायत पर कार्रवाई की गई। एफआईआर के अनुसार भारत सरकार की समर्थन मूल्य योजना अंतर्गत रबी विपणन वर्ष 2024-25 में नेफेड के माध्यम से सरसों की खरीदी की गई थी। यह खरीदी सेवा सहकारी समिति छिरारी और रहली उपकेंद्र खैराना द्वारा की गई थी। जांच में पाया गया कि खरीदी के समय किसी भी बोरी पर किसान कोड अंकित नहीं किया गया, जो नियमों का उल्लंघन है।

 

वेयरहाउस से उठाव के दौरान खरीदार पक्ष ने शिकायत की कि कई बोरियों में सरसों के साथ मिट्टी से बने नकली दाने मिले हैं। इसके बाद 14 अक्टूबर को संयुक्त निरीक्षण कर पंचनामा बनाया गया। पानी में परीक्षण करने पर सरसों के दाने तैरते पाए गए, जिससे मिलावट की पुष्टि हुई। प्रारंभिक आकलन में प्रति क्विंटल करीब 35 से 40 प्रतिशत मिलावट सामने आई।

 

रिकॉर्ड के मुताबिक छिरारी और खैराना समितियों द्वारा कुल करीब 8950 क्विंटल सरसों का भंडारण किया गया था, जिसमें से 8693 क्विंटल का विक्रय हो चुका है, जबकि 257 क्विंटल सरसों अभी भी वेयरहाउस में जमा है।

 

पुलिस ने इस मामले में

 

छिरारी समिति संचालक विजय कुमार जैन,

 

रहली उपकेंद्र खैराना समिति संचालक जगदीश लोधी,

 

एनसीएमएल सर्वेयर अभिषेक दुबे और पुष्पेंद्र साहू,

 

तथा एमपी वेयरहाउसिंग लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन की तत्कालीन शाखा प्रबंधक वर्षा तोमर

 

 

के खिलाफ विभिन्न धाराओं में अपराध दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।