आगर-मालवा। जनवरी 2026 में राजस्थान के घाटाखेड़ी क्षेत्र में मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ आगर पुलिस की कार्रवाई से जुड़े बहुचर्चित मामले में अपर सत्र न्यायालय (एडीजे), भवानीमंडी ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, चौमहला द्वारा आगर कोतवाली थाना प्रभारी शशि उपाध्याय सहित करीब 100 पुलिसकर्मियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने संबंधी 11 जून एवं 15 जून 2026 के दोनों आदेश निरस्त कर दिए हैं। इस फैसले को आगर पुलिस के लिए बड़ी कानूनी राहत माना जा रहा है।

यह मामला जनवरी 2026 में घाटाखेड़ी में मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ आगर पुलिस की कार्रवाई से जुड़ा है, जिसमें आरोपियों की गिरफ्तारी और करोड़ों रुपये का मादक पदार्थ जब्त किया गया था। कार्रवाई के बाद घाटाखेड़ी निवासी हमीद खान ने परिवाद प्रस्तुत किया था, जिस पर निचली अदालत ने टीआई, निरीक्षक, उप निरीक्षक, एएसआई और आरक्षकों सहित करीब 100 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे। इसके आधार पर राजस्थान के डग थाने में प्रकरण भी दर्ज हुआ था।

पुलिसकर्मियों ने इन आदेशों को एडीजे कोर्ट में चुनौती दी। उनकी ओर से अधिवक्ता हरिश खंडेलवाल ने तर्क दिया कि संबंधित पुलिसकर्मी शासकीय कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे थे और उनके विरुद्ध कार्रवाई से पहले वैधानिक प्रक्रिया एवं कानूनी संरक्षण का पालन नहीं किया गया। साथ ही परिवाद की मंशा और पृष्ठभूमि पर भी सवाल उठाए गए।

सभी पक्षों की सुनवाई के बाद एडीजे राजीव दत्तात्रेय ने माना कि निचली अदालत ने तथ्यों और आवश्यक वैधानिक प्रावधानों का समुचित परीक्षण किए बिना आदेश पारित किए थे। इसी आधार पर दोनों आदेश निरस्त कर दिए गए।

अधिवक्ता हरिश खंडेलवाल के अनुसार, एफआईआर दर्ज कराने के मूल आदेश निरस्त होने के बाद डग थाने में दर्ज एफआईआर भी स्वतः प्रभावहीन हो जाएगी। इस फैसले को न केवल आरोपित पुलिसकर्मियों के लिए राहत, बल्कि पुलिस बल के मनोबल को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।