लेटर बम फटते ही सहमा रसूखदार अहूजा परिवार!
27 को मिली धमकी, एसपी दफ्तर पहुंचने में लग गए पूरे दो दिन
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के पत्र ने उड़ाई नींद
उमरिया। कहते हैं कि जब पाप का घड़ा भरता है, तो उसकी आवाज दूर तक जाती है, लेकिन उमरिया में जब रसूख की बुनियाद पर खड़े अवैध साम्राज्य के कागजात सोशल मीडिया पर लीक हुए, तो उसकी आवाज सीधे पुलिस कप्तान के दफ्तर में सुनाई दी। नगर तथा ग्राम निवेश (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग) जिला कार्यालय शहडोल का एक सरकारी पत्र क्या बाहर आया, शहर के तथाकथित रसूखदार अहूजा परिवार की रातों की नींद और दिन का चैन हवा हो गया। खुद को कानून से ऊपर समझने वाले माननीय अब अचानक खुद को पीडि़त साबित करने के लिए पुलिस अधीक्षक की चौखट पर नाक रगड़ते नजर आ रहे हैं।
48 घंटे तक कहां चल रही थी स्क्रिप्टिंग
शिकायतों और कागजी घोड़ों की रेस देखें तो चंद्रप्रकाश अहूजा, किशोर कुमार अहूजा, विनोद कुमार अहूजा, पूजा और वन्दना अहूजा ने बीती 30 जून 2026 को उमरिया एसपी को एक शिकायती पत्र सौंपा। आरोप है कि 27 जून 2026 की रात करीब 11 बजे, जब यह पूरा कुनबा जैन मंदिर के पास से गुजर रहा था, तब विकास सचदेव ने इनका रास्ता रोका और कट्टा अड़ाने के साथ धमकी दी कि या तो पुराने केस वापस लो, नहीं तो 50 लाख रुपए दो, वरना झूठे केस में फंसा देंगे। अब जरा सोचिए, जो परिवार दिन-रात अपने रूतबे की हनक में जीता हो, जिसके रसूख से लोग कतराते हों, वह 27 तारीख की रात को मिली धमकी से इतना कांप गया कि उसे एसपी दफ्तर के मुख्य गेट तक पहुंचने में पूरे दो दिन यानी 48 घंटे लग गए, चर्चाओं का बाजार गर्म है कि यह दो दिन का समय कहीं पर्दे के पीछे किसी लीगल एडवाइजर के वातानुकूलित कमरे में बैठकर नई स्क्रिप्ट लिखने और कहानी गढऩे में तो नहीं लगा?
न्याय के आड़े आया वस्त्र परिधान!
जब शिकायतकर्ता विनोद आहूजा से पूछा गया कि भाईसाहब दो दिन तक कहां लापता थे, तो उनका जवाब था कि मैं 27 तारीख की रात को चड्ढा पहना था, इसलिए मैं रिपोर्ट नहीं कर पाया, दूसरे दिन एसपी और तीसरे दिन कोतवाली में रिपोर्ट किया, मिलकर सच्चाई और बताऊंगा। साहब को रात में धमकी मिली, जान का खतरा था, लेकिन वो थाने इसलिए नहीं गए क्योंकि उन्होंने चड्ढा पहन रखा था, मतलब, उमरिया पुलिस अब कपड़ों का मुआयना करके एफआईआर लिखेगी? यह चड्ढा थ्योरी सोशल मीडिया पर हंसी का पात्र बनी हुई है। सच तो यह है कि यह दो दिन चड्ढा बदलने में नहीं, बल्कि सरकारी चाबुक से बचने का पैंतरा ढूंढने में बीते हैं।
तो याद आई पुलिस की शरण
दरअसल, इस पूरी नौटंकी का असली ट्रिगर 29 जून को दबा। विकास सचदेव की शिकायत पर सहायक संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश जिला कार्यालय शहडोल का एक पत्र शासकीय गलियारों से निकलकर सोशल मीडिया पर वॉयरल हो गया। इस पत्र ने अहूजा परिवार के पैरों तले जमीन खिसका दी। पत्र में साफ-साफ दर्ज है कि चन्द्रप्रकाश अहूजा ने कूटरचित, फर्जी दस्तावेजों और झूठे शपथ पत्र के दम पर विभाग से विकास अनुज्ञा (परमिशन) पत्र क्रमांक 33/उमरिया/वि.अ./2019 दिनांक 19/07/2019 हथिया ली थी। विभागीय जांच में खुलासा हुआ है कि ग्राम लालपुर (उमरिया खास) की जिस भूमि का मुआवजा सरकार पहले ही बांट चुकी थी, उस सरकारी भूमि पर फर्जी शपथ पत्र और रकबा बढ़ाकर फर्जी खसरा लगाकर यह अनुमति ली गई और धड़ल्ले से अवैध निर्माण तान दिया गया। विभाग ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बांधवगढ़ को पत्र लिखकर इस फर्जीवाड़े की जांच कर अनुज्ञा निरस्त करने और कानूनी कार्रवाई का फरमान जारी कर दिया है। जैसे ही 29 जून को यह पोल खुली, वैसे ही अपनी चमड़ी बचाने के लिए 30 जून को अहूजा परिवार ने 27 जून की बासी धमकी का पिटारा एसपी के सामने खोल दिया।
दूध का दूध और पानी का पानी होना जरूरी
जब तक मामला कोर्ट-कचहरी और मानहानि के दावों तक था, तब तक यह आपसी रंजिश दिखती थी, लेकिन जैसे ही शासकीय भूमि को निगलने और फर्जी खसरे का जिन्न बोतल से बाहर आया, रसूखदारों ने विक्टिम कार्ड खेल दिया। अब जिला प्रशासन और पुलिस कप्तान की जिम्मेदारी है कि वे इस चड्ढा धारी शिकायत और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के फर्जीवाड़े वाले पत्र, दोनों की बारीक और निष्पक्ष जांच करें।
इनका कहना है...
मैं 27 तारीख की रात को चड्ढा पहना था, इसलिए मैं रिपोर्ट नहीं कर पाया , दूसरे दिन एसपी और तीसरे दिन कोतवाली में रिपोर्ट किया, मिलकर सच्चाई और बताऊंगा।
विनोद आहूजा
शिकायतकर्ता
Comments (0)