सतना।** वायु प्रदूषण की समस्या को कम करने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से पराली प्रबंधन को लेकर आधुनिक कृषि पद्धतियों पर जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में किसान ऊर्जा द्वारा सतना जिले के सितपुर और बरैसधिया में आयोजित समृद्धि कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को पराली प्रबंधन और उन्नत खेती की तकनीकों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में किसानों को बताया गया कि पराली को खेतों में जलाने के बजाय उसका उचित प्रबंधन कर उपयोगी संसाधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, कृषि अवशेषों के बेहतर उपयोग से किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर भी विकसित किए जा सकते हैं।
किसान ऊर्जा की पहल के तहत आदर्श किसान खेत कार्यक्रम से जुड़े किसानों को सम्मानित किया गया। इस दौरान किसानों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने से उनकी आय में लगभग 20 से 25 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। हालांकि, यह आंकड़ा किसानों द्वारा साझा किए गए अनुभवों पर आधारित है।
कार्यक्रम में किसान दीदी द्वारा दिए गए प्रशिक्षण के जरिए किसानों को पराली प्रबंधन, आधुनिक कृषि तकनीकों और संसाधनों के बेहतर उपयोग की जानकारी दी गई। किसानों को खेती में नए तरीकों को अपनाने और कृषि कार्यों को अधिक टिकाऊ बनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
किसान ऊर्जा की पहल का उद्देश्य **‘खेती वही, तरीके नए, कमाई बेहतर’** के मंत्र के साथ किसानों को आधुनिक कृषि ज्ञान से जोड़ना है। सतना के अलावा आंध्र प्रदेश के नेल्लोर में भी इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।
पराली को समस्या के बजाय उपयोगी संसाधन में बदलने की दिशा में उचित प्रबंधन, तकनीकी प्रशिक्षण और बाजार से जुड़ाव महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की संभावनाएं बढ़
सकती हैं।
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