इंदौर का ऐतिहासिक राजवाड़ा (फाइल फोटो) फोटो साभार Wikimedia Commons / Bernard Gagnon, CC BY-SA 3.0

इंदौर जिले के शहरी और ग्रामीण, दोनों इलाकों को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित कर दिया गया है। अब जिले में कोई भी व्यक्ति नया निजी नलकूप या बोरवेल नहीं खुदवा सकेगा।

कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी शिवम वर्मा ने यह आदेश मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 और उसके संशोधन अधिनियम 2002 के तहत जारी किया है। आदेश के अनुसार प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश तक लागू रहेगा। इस साल जिले में सामान्य से कम बारिश हुई है और भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है, इसलिए गर्मी से पहले ही पेयजल स्रोतों को बचाने के लिए यह कदम उठाया गया है।

आदेश की 4 बड़ी बातें…

  • पूरा जिला दायरे में, नगर निगम सीमा के साथ सभी ग्रामीण क्षेत्र भी जल अभावग्रस्त घोषित।
  • निजी बोर पर रोक, निजी और गैर सरकारी नलकूप खनन आगामी आदेश तक प्रतिबंधित।
  • सरकारी योजना को छूट, शासकीय योजनाओं के तहत होने वाले नलकूप खनन पर प्रतिबंध लागू नहीं।
  • सख्त सजा, उल्लंघन पर ₹2,000 तक जुर्माना या 2 साल तक कारावास या दोनों।

PHE के दोनों कार्यपालन यंत्रियों की सिफारिश पर फैसला

आदेश के मुताबिक नगर पालिक निगम इंदौर के जलप्रदाय विभाग के कार्यपालन यंत्री और ग्रामीण क्षेत्र के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के कार्यपालन यंत्री ने जिले को जल अभावग्रस्त घोषित करने की अनुशंसा की थी। दोनों विभागों ने गिरते भूजल स्तर और आने वाले महीनों में पेयजल संकट की आशंका का हवाला दिया।

आदेश के अनुसार भूजल के अधिक दोहन से कई पेयजल स्रोतों और नलकूपों का जलस्तर तेजी से घट रहा है।

ग्राफिक से समझिए, आदेश लागू होने के बाद जिले में कौन से नियम चलेंगे…

इंदौर जिले में जल अभावग्रस्त घोषणा के बाद लागू नियम
इंदौर जिले में जल अभावग्रस्त घोषणा के बाद लागू नियम

बोरिंग मशीन जब्त होगी, राजस्व पुलिस और निगम को अधिकार

आदेश में राजस्व, पुलिस और नगर निगम के अधिकारियों को कार्रवाई का अधिकार दिया गया है। प्रतिबंधित क्षेत्र में घुसने वाली या बोरिंग की कोशिश करने वाली मशीनें जब्त की जा सकेंगी। संबंधित लोगों के खिलाफ अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई होगी।

पेयजल परिरक्षण अधिनियम की धारा 9 के मुताबिक धारा 3 या धारा 4 के तहत जारी आदेश का उल्लंघन करने पर 2 साल तक का कारावास, ₹2,000 तक का जुर्माना या दोनों सजाएं दी जा सकती हैं। यानी चोरी छिपे बोर खुदवाना महंगा पड़ सकता है।

जरूरत पड़ी तो निजी नलकूप भी लेगा प्रशासन

आदेश में साफ किया गया है कि सार्वजनिक पेयजल व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरत पड़ने पर अधिनियम की धारा 4 के तहत नए खोदे गए निजी नलकूप और दूसरे निजी जल स्रोत अधिग्रहित किए जा सकते हैं।

अधिनियम की धारा 4-क के तहत कलेक्टर किसी जल स्रोत को अस्थायी रूप से 4 महीने तक अधिग्रहित कर सकते हैं, जिसे 2 महीने और बढ़ाया जा सकता है। मालिक को किराया देने का भी प्रावधान है।

आप पर क्या असर, अनुमति कैसे लें

अगर आप घर, दुकान, फैक्ट्री या खेत के लिए नया बोर खुदवाने की तैयारी में थे, तो अब बिना अनुमति यह काम नहीं हो सकेगा। पहले से चालू नलकूपों के उपयोग पर इस आदेश में रोक का जिक्र नहीं है, लेकिन जरूरत पड़ने पर प्रशासन उन्हें सार्वजनिक पेयजल के लिए ले सकता है।

पेयजल परिरक्षण अधिनियम की धारा 6 और आदेश के प्रावधानों के अनुसार अनुमति की प्रक्रिया इस तरह है…

  • आवेदन कहां, धारा 6 के मुताबिक जल अभावग्रस्त क्षेत्र में नलकूप के लिए कलेक्टर या उनके अधिकृत अधिकारी की अनुमति जरूरी है। आवेदन तय प्रारूप और शुल्क के साथ देना होता है।
  • कौन देगा अनुमति, जिला प्रशासन के आदेश के अनुसार अपरिहार्य स्थिति में संबंधित क्षेत्र के अपर कलेक्टर शर्तों के साथ अनुमति दे सकेंगे।
  • जांच रिपोर्ट, शहरी क्षेत्र में नगर निगम के जलप्रदाय विभाग और ग्रामीण क्षेत्र में PHE के कार्यपालन यंत्री की जांच रिपोर्ट के आधार पर फैसला होगा।
  • पंजीकृत एजेंसी, अनुमति मिलने पर खनन केवल पंजीकृत एजेंसी से ही कराया जा सकेगा।
  • 150 मीटर का नियम, अधिनियम के अनुसार सरकारी या स्थानीय निकाय के सार्वजनिक पेयजल नलकूप के 150 मीटर दायरे में आम तौर पर नए नलकूप की अनुमति नहीं दी जाती।

धारा 3 के तहत कलेक्टर को है यह अधिकार

मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 3 कलेक्टर को यह अधिकार देती है कि घरेलू उपयोग के लिए पीने के पानी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए वे जिले के किसी क्षेत्र को तय अवधि के लिए जल अभावग्रस्त घोषित कर सकें। इसके बाद उस क्षेत्र में गैर घरेलू उपयोग के लिए पानी लेने और नया नलकूप खोदने पर कलेक्टर की अनुमति जरूरी हो जाती है।

अब आगे क्या

प्रतिबंध तब तक जारी रहेगा जब तक जिला प्रशासन नया आदेश जारी नहीं करता। राजस्व, पुलिस और नगर निगम का अमला अपने अपने क्षेत्र में निगरानी करेगा। नया बोर खुदवाने से पहले नागरिक अपने क्षेत्र के अनुविभागीय कार्यालय या कलेक्टर कार्यालय से अनुमति की स्थिति जरूर जान लें।

ग्राफिक- StateNews

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या इंदौर में अब नया बोरवेल खुदवा सकते हैं?

नहीं, पूरे जिले में निजी और गैर सरकारी नलकूप खनन पर आगामी आदेश तक रोक है। अपरिहार्य स्थिति में सक्षम अधिकारी की अनुमति से ही खनन हो सकेगा।

बिना अनुमति बोर खुदवाने पर क्या सजा है?

पेयजल परिरक्षण अधिनियम के तहत ₹2,000 तक जुर्माना, 2 साल तक कारावास या दोनों हो सकते हैं। बोरिंग मशीन भी जब्त की जा सकती है।

क्या सरकारी योजनाओं के नलकूप पर भी रोक है?

नहीं, शासकीय योजनाओं के तहत होने वाले नलकूप खनन को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है।

यह प्रतिबंध कब तक लागू रहेगा?

आदेश तत्काल प्रभाव से लागू है और जिला प्रशासन के अगले आदेश तक जारी रहेगा।

स्रोत जिला प्रशासन इंदौर, मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 (अधिनियम क्रमांक 3