बकाया भुगतान को लेकर फूटा आशा-ऊषा कार्यकर्ताओं का गुस्सा, कलेक्ट्रेट गेट पर घंटों प्रदर्शन

बड़वानी। लंबे समय से लंबित मानदेय और प्रोत्साहन राशि के भुगतान को लेकर शुक्रवार को जिलेभर की आशा-ऊषा कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ता हाथों में बैनर लेकर नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचीं और सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक मुख्य गेट पर प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन के दौरान कलेक्टर कार्यालय के मुख्य गेट पर ताला लगाकर महिलाओं को अंदर जाने से रोका गया। तपती धूप में खड़ी महिलाओं ने शासन-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए लंबित भुगतान और मांगों को पूरा करने की आवाज बुलंद की।

कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कई महीनों से मानदेय और प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं हुआ है, जिससे परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने मांग की कि वेतन और प्रोत्साहन राशि नियमित और एकमुश्त दी जाए। साथ ही जुलाई 2023 की महापंचायत में घोषित मानदेय वृद्धि और एरियर का भुगतान भी तत्काल किया जाए।

प्रदर्शन के दौरान नायब तहसीलदार सोनू गोयल ज्ञापन लेने पहुंचीं, लेकिन कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन देने से इनकार करते हुए कहा कि वे सीधे कलेक्टर से ही चर्चा करेंगी। काफी देर तक समझाइश के बाद महिलाओं को मंगलवार को कलेक्टर से मिलने का समय दिया गया।

कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल और उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगी। उन्होंने लंबित तदर्थ समिति राशि, आयुष्मान और टीबी प्रोत्साहन राशि का तत्काल भुगतान करने की मांग रखी।

आशा कार्यकर्ता अनिता नागौर ने बताया कि जिले की करीब 1000 से अधिक कार्यकर्ता आर्थिक संकट से गुजर रही हैं। समय पर भुगतान नहीं मिलने से बच्चों की पढ़ाई और परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।

प्रदर्शन के दौरान कुछ महिलाओं ने विभाग के डीपीएम अशोक कनाडे पर धमकाने के आरोप भी लगाए। वहीं विभागीय अधिकारियों ने महिलाओं को समझाते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की राशि अलग-अलग जारी होती है, इसलिए भुगतान में देरी हो रही है। बावजूद इसके कार्यकर्ता अपनी मांगों पर अड़ी रहीं।