बैतूल: जिले के किसानों के लिए एक अच्छी खबर है। कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी के निर्देशानुसार, गन्ने की नरवाई प्रबंधन के लिए निशुल्क सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। कृषि अभियांत्रिकी के डॉ. प्रमोद मीना और उप संचालक कृषि श्री आनंद बड़ोनिया ने ग्राम ग्यारसपुर और खेड़ला किला में बेलर और है-रेक कृषि यंत्र का जीवंत प्रदर्शन किया।

उप संचालक श्री बड़ोनिया ने बताया कि राज्य शासन द्वारा किसानों के लिए आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। बेलर मशीन ऐसे ही एक समाधान के रूप में उभरी है, जो फसल कटाई के बाद शेष अवशेषों जैसे पराली का वैज्ञानिक और उपयोगी प्रबंधन सुनिश्चित करती है। इस मशीन की मदद से पराली को एकत्र कर सघन गांठों में परिवर्तित किया जाता है, जिससे वायु प्रदूषण में कमी आती है और पर्यावरण संरक्षण को बल मिलता है।

जिले में गन्ने का रकबा 24,500 हेक्टेयर है, जहां मुख्य रूप से आमला, बैतूल बाजार और चिचोली के किसान गन्ने का उत्पादन करते हैं। किसान अब है-रेक और बेलर यंत्र की मदद से पराली को एकत्रित कर उचित नरवाई प्रबंधन कर सकते हैं।

  • बेल की साइज: 250 से 350 केजी
  • स्टॉक सेंटर: मिलानपुर के पास
  • फायदे: पराली जलाने की समस्या का समाधान और समय की बचत

नरवाई प्रबंधन के तहत बैतूल, आमला, चिचोली के किसानों के लिए कृषि अभियांत्रिकी और संजय स्ट्रा सप्लायर द्वारा है-रेक और बेलर यंत्र से बेल बनाकर मक्का, धान और गन्ना की नरवाई का उचित प्रबंधन किया जा रहा है, जो पूर्णतः निशुल्क है।

किसान इस सुविधा का लाभ उठाकर अपने खेतों को अगली फसल के लिए तैयार कर सकते हैं।