बैतूल: वैलेंटाइन डे को आमतौर पर प्रेम के उत्सव के रूप में मनाया जाता है, लेकिन बदलते सामाजिक परिवेश में यह दिन युवाओं के लिए भावनात्मक दबाव का कारण बनता जा रहा है। मनोवैज्ञानिक डॉ. संदीप गोहे ने कहा कि सोशल मीडिया पर परफेक्ट रिश्तों और महंगे सरप्राइज का प्रदर्शन युवाओं में तुलना की प्रवृत्ति बढ़ा रहा है, जिससे मानसिक तनाव उत्पन्न हो रहा है।
डॉ. गोहे के अनुसार, कई युवा इस दिन को अपने रिश्ते की परीक्षा मान लेते हैं। अपेक्षाओं के अनुरूप न होने पर असुरक्षा, आत्म-संदेह और निराशा की भावनाएं जन्म लेती हैं। सिंगल युवाओं में अकेलापन और आत्म-आलोचना की स्थिति भी देखने को मिलती है, जो आगे चलकर चिंता और अवसाद का रूप ले सकती है।
उन्होंने कहा कि स्वस्थ संबंध दिखावे पर नहीं, बल्कि विश्वास और पारस्परिक सम्मान पर आधारित होते हैं। युवाओं को चाहिए कि वे प्रेम को केवल एक दिन के प्रदर्शन से न जोड़ें। अपनी भावनाओं को समझें और आत्मसम्मान को प्राथमिकता दें।
महत्वपूर्ण सुझाव:
- प्रेम को दबावमुक्त और भावनात्मक रूप से सुरक्षित बनाएं।
- सोशल मीडिया पर दिखावे के चक्कर में न पड़ें।
- अपनी भावनाओं और आत्मसम्मान को समझें और प्राथमिकता दें।
डॉ. गोहे ने अंत में कहा कि प्रेम तभी सकारात्मक बनता है जब वह दबावमुक्त हो और भावनात्मक सुरक्षा प्रदान करता हो। युवाओं को चाहिए कि वे इसे एक दिन के प्रदर्शन की बजाय अपने जीवन का स्थायी हिस्सा बनाएं।
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