भोपाल (मध्य प्रदेश): राजधानी भोपाल की धरती से सफलता की एक ऐसी कहानी निकलकर सामने आई है, जो न केवल प्रेरणादायक है बल्कि समाज की उन रूढ़ियों को भी तोड़ती है जो महिलाओं को केवल घर की चारदीवारी तक सीमित मानती हैं। यह कहानी है 'कुसुमा मेकअप आर्टिस्ट स्टूडियो' की फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर कुसुमा की, जिन्होंने एक साधारण गृहिणी से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रोफेशनल मेकअप आर्टिस्ट बनने तक का सफर बेहद संघर्षों के साथ तय किया है। आज वे न केवल एक सफल उद्यमी हैं, बल्कि सैकड़ों महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुकी हैं।
पीएससी का सफर और जीवन का निर्णायक मोड़
कुसुमा का शुरुआती जीवन एक सामान्य मध्यवर्गीय महिला की तरह ही था, जहाँ उनकी प्राथमिकताएं केवल परिवार और बच्चों तक सीमित थीं।
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प्रशासनिक सेवा का सपना: दो बच्चों की परवरिश के साथ-साथ कुसुमा ने प्रशासनिक सेवा (PSC) में जाने का संकल्प लिया था। अपनी कड़ी मेहनत से उन्होंने कई बार 'प्री-एग्जाम' भी क्लियर किया।
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जिम्मेदारियों की दीवार: पारिवारिक उत्तरदायित्वों और समय के अभाव के कारण वे 'मेंस' की तैयारी पूरी नहीं कर सकीं। जब एक सपना अधूरा छूटता नजर आया, तब उनकी माँ ने उन्हें उनके पुराने हुनर की याद दिलाई।
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बदलाव की शुरुआत: शादी से पहले सीखे हुए पार्लर कोर्स को अपना आधार बनाकर उन्होंने मेकअप इंडस्ट्री में दोबारा कदम रखने का फैसला किया, जो उनके जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
चुनौतियां: लोन का बोझ और समाज के तंज
सफलता की चमक के पीछे अंधेरी रातों का लंबा संघर्ष छिपा होता है। कुसुमा के लिए यह व्यावसायिक सफर कांटों भरा था।
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आर्थिक संकट: शुरुआत में उनके पास न तो बड़ा सेटअप था और न ही कोई मजबूत आर्थिक सहारा। उन्होंने बैंक से लोन लेकर अपने सपनों की नींव रखी।
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मानसिक दबाव: एक महिला जब घर से बाहर निकलकर कुछ बड़ा करने की कोशिश करती है, तो उसे अक्सर सामाजिक और मानसिक दबावों का सामना करना पड़ता है। कुसुमा ने भी लोगों की कड़वी बातें सुनीं, लेकिन अपना ध्यान लक्ष्य से नहीं भटकने दिया।
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कौशल विकास: खुद को मार्केट के अनुसार अपडेट करने के लिए उन्होंने देश के बड़े मेकअप आर्टिस्ट्स से ट्रेनिंग ली और नई तकनीकों को सीखकर अपनी स्किल्स को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाया।
उपलब्धियां: 'कुसुमा मेकअप आर्टिस्ट स्टूडियो' की स्थापना
आज कुसुमा के काम की गूँज केवल भोपाल ही नहीं, बल्कि दूर-दूर तक है। उनके ब्रांड ने ब्राइडल मेकअप के क्षेत्र में नए मापदंड स्थापित किए हैं।
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प्रोफेशनल ट्रेनिंग सेंटर: उनका स्टूडियो अब केवल मेकअप तक सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ प्रोफेशनल मेकअप कोर्सेज भी संचालित किए जाते हैं।
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आत्मनिर्भरता की राह: यहाँ से ट्रेनिंग लेकर कई लड़कियां आज खुद का काम शुरू कर चुकी हैं और आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनी हैं।
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निःशुल्क मार्गदर्शन: कुसुमा उन लड़कियों को फ्री गाइडेंस और परामर्श भी देती हैं, जो आगे बढ़ना चाहती हैं लेकिन सही दिशा नहीं मिल पा रही। उनका मानना है कि महिलाओं को किसी और के सपोर्ट का इंतजार करने के बजाय खुद अपनी ताकत बनना चाहिए।
सफलता का मूलमंत्र: मेहनत और धैर्य
अपनी इस उपलब्धि पर कुसुमा का कहना है कि सफलता के लिए किसी की अनुमति की आवश्यकता नहीं होती।
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खुद पर विश्वास: वे कहती हैं, “सफलता के पीछे कई बिना सोई हुई रातें और निरंतर किया गया संघर्ष छिपा होता है। आज लोग मेरी सफलता देखते हैं, लेकिन इस मुकाम तक पहुँचने के लिए अटूट धैर्य और खुद पर विश्वास जरूरी था।”
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प्रेरणादायक संदेश: उनकी कहानी उन सभी महिलाओं के लिए एक संदेश है जो घर की जिम्मेदारियों के नीचे अपने सपनों को दबा देती हैं। कुसुमा ने यह साबित कर दिखाया कि यदि इरादे फौलादी हों, तो उम्र और परिस्थितियां कभी बाधक नहीं बन सकतीं।
निष्कर्ष
भोपाल की कुसुमा आज उन हजारों महिलाओं के लिए उम्मीद की एक किरण हैं, जो अपनी अलग पहचान बनाना चाहती हैं। उनका स्टूडियो आज केवल सौंदर्य का केंद्र नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण की पाठशाला बन चुका है। संघर्ष से सफलता तक का उनका यह सफर वाकई काबिले तारीफ है।
image source : Kusumas Makeup Artist Studio
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Comments (2)
Congratulations my dear sister.....and that is kusum.....
Congratulations