भोपाल, 2026: भारतीय नव वर्ष के आगमन का विशेष आनंद तब होता है जब प्रकृति में नव सृजन होता है। बसंत की खुशबू, फसलों का पूर्ण चक्र और किसानों के परिवारों में खुशी का माहौल - यही है नव संवत्सर का असली अर्थ।
इस पावन अवसर पर, विक्रम संवत 2083 के उपलक्ष्य में भोपाल के रवींद्र भवन में 'विक्रमोत्सव-2026' का आयोजन किया गया। इस अवसर पर 'कोटि-कोटि सूर्योपासना' कार्यक्रम का भी भव्य आयोजन किया गया, जिसमें ब्रह्म ध्वज की स्थापना कर सभी के लिए मंगलकामना की गई।
सम्राट विक्रमादित्य की सुशासन, दानशीलता, न्यायप्रियता और उत्कृष्ट व्यवस्था की गौरवशाली विरासत आज भी कालजयी प्रतीक के रूप में जीवित है। राज्य सरकार इस विरासत को सहेजने और नागरिकों को इससे जोड़ने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कई प्रयास कर रही है।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल विक्रमादित्य की आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाना था, बल्कि समाज को उनके सुशासन के सिद्धांतों से प्रेरित करना भी था।
समारोह का समापन सभी प्रतिभागियों के लिए शुभकामनाओं के साथ हुआ, जिसमें उम्मीद की गई कि यह नव वर्ष सभी के लिए समृद्धि और खुशहाली लेकर आए।
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