ग्वालियर: ग्वालियर में हाईकोर्ट ने एडवोकेट अनिल मिश्रा की गिरफ्तारी को अवैध ठहराते हुए उन्हें 1 लाख के बांड पर जमानत दे दी है। यह निर्णय तब आया जब 1 जनवरी को अनिल मिश्रा और उनके समर्थकों द्वारा आईजी और एसपी ऑफिस के बाहर डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के चित्रों को जलाया गया था।
पुलिस ने अनिल मिश्रा समेत चार लोगों को बिना एफआईआर के गिरफ्तार कर लिया था, जो कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन था। कोर्ट ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जब अंबेडकर के चित्रों को जलाया जा रहा था, तब पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास क्यों नहीं किया। हालांकि, कोर्ट ने अनिल मिश्रा पर दर्ज की गई एफआईआर को सही माना है।
अनिल मिश्रा के वकीलों का कहना है कि गिरफ्तारी में कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। पहले गिरफ्तारी की गई और फिर एफआईआर दर्ज की गई, जबकि एससी एसटी एक्ट के तहत नोटिस देकर छोड़ने का प्रावधान है। पुलिस ने इस कानून का पालन नहीं किया।
जेएमएफसी मधुलिका खत्री की अदालत ने अनिल मिश्रा को 14 जनवरी तक जेल भेज दिया था। पुलिस ने अंबेडकर के चित्र जलाने के मामले में कुल सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी, जिनमें से तीन अभी भी फरार हैं।
इस घटना ने ग्वालियर में कानून व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कोर्ट का यह निर्णय पुलिस को अपनी प्रक्रिया में सुधार करने की ओर एक स्पष्ट संदेश है।
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