कागजों पर 'सील', जमीन पर 'सक्रिय': जिला प्रशासन की आंखों में झोंकी जा रही धूल
*रायसेन।** जिला प्रशासन और खनिज विभाग की नाक के नीचे अवैध उत्खनन का खेल रुकने का नाम नहीं ले रहा है। तत्कालीन कलेक्टर अरविंद दुबे द्वारा मार्च 2024 में ग्राम कानपोहरा की जिस पत्थर खदान पर ₹56 करोड़ से अधिक का ऐतिहासिक जुर्माना ठोंका गया था, वह आज भी माफियाओं के लिए "सोने की खान" बनी हुई है। प्रशासन ने कागजों पर तो इस खदान को बंद घोषित कर दिया है, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल उलट है।
### **जुर्माने के बाद भी नहीं थमी धमक**
गौरतलब है कि कलेक्टर कोर्ट ने भोपाल निवासी आफताब हुसैन पर 31,032 घन मीटर फर्शी पत्थर के अवैध उत्खनन और परिवहन के मामले में ₹56 करोड़ 60 लाख 29 हजार 200 का भारी-भरकम जुर्माना लगाया था। इसके साथ ही मौके से पोकलेन मशीनें और डंपर जब्त कर उन्हें राजसात करने के आदेश भी दिए गए थे। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतना सख्त आदेश भी खनन माफिया के हौसले पस्त नहीं कर पाया। आज भी मौके पर क्रेन मशीनें और डंपरों का जमावड़ा लगा रहता है, जो इस बात का प्रमाण है कि उत्खनन का सिलसिला थमा नहीं है। वही जुर्माना का प्रकरण कमिश्नर कोर्ट में चल रहा है तो दूसरी तरफ जमकर उत्खनन जारी है जो अधिकारियों की नाकामी को सिद्ध कर रहा है।
### **खनिज विभाग की भूमिका पर सवाल**
खदान से प्रतिदिन लाखों रुपए का पत्थर निकाला जा रहा है और दर्जनों डंपर सड़कों पर दौड़ रहे हैं। सवाल यह उठता है कि जब प्रशासन ने खदान को बंद कर दिया है और मशीनों को अधिग्रहित करने का आदेश दिया था, तो फिर यह उत्खनन किसकी अनुमति से हो रहा है? परिवहन के लिए आवश्यक परमिट के बिना इतने बड़े पैमाने पर पत्थरों की आवाजाही खनिज विभाग की "मिलीभगत" की ओर साफ इशारा करती है।
### **सरकारी राजस्व को लग रहा चूना**
सर्वे क्रमांक 5, 6 और 7 की लगभग 71 हेक्टेयर भूमि पर फैला यह अवैध कारोबार न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुँचा रहा है, बल्कि शासन के राजस्व में भी सेंध लगा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन केवल जुर्माना लगाने की औपचारिकता पूरी करता है, जबकि मौके पर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस निगरानी तंत्र मौजूद नहीं है। यदि समय रहते इस पर लगाम नहीं लगाई गई, तो यह सरकारी तंत्र की विफलता का सबसे बड़ा उदाहरण बनेगा। वर्तमान में रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा द्वारा समय-समय पर अवैध उत्खनन को लेकर कार्रवाई के निर्देश खनिज विभाग को दिए जाते हैं लेकिन खनिज विभाग छुटपुट कार्रवाई कर जमकर वाह वाही लूटता है लेकिन बड़े माफिया के आगे नतमस्तक होकर जमकर चांदी काटने में झुक जाता है स्थानीय ग्रामीणों ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि अधिकारियों के संरक्षण से यह खदान संचालित हो रही है उन्हें हर महीना पहुंच जाता है। वही संबंध में खनिज अधिकारी सुमित गुप्ता से चर्चा की तो उन्होंने कहा कि मैं अस्पताल में हूं बाद में बात करता हूं वहीं जिला खनिज अधिकारी पटेल से भी चर्चा करने की काफी कोशिश की गई लेकिन उनका मोबाइल नंबर व्यस्त बताता रहा। जिससे अंदाज लगाया जा सकता है कि खनिज के अवैध उत्खनन और परिवहन को रोकने के लिए जिम्मेदार अधिकारी कितने सतर्क है।
मध्य प्रदेश स्पेशल
बेअसर: कागजों पर बंद खदान से हर दिन निकल रहा लाखों का पत्थर
बेअसर: कागजों पर बंद खदान से हर दिन निकल रहा लाखों का पत्थर
May 14, 2026 06:25 PM
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