रायसेन: कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने जिले के नागरिकों के लिए साफ और शुद्ध पेयजल की सतत उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में सभी एसडीएम, तहसीलदार, जनपद पंचायत सीईओ, सीएमओ, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और जल निगम के अधिकारियों को जलापूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त रखने, पाइपलाइन रिसाव की त्वरित पहचान, और पेयजल गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
कलेक्टर ने जोर देकर कहा कि पेयजल का संबंध आमजन के स्वास्थ्य से है, जिसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने जलापूर्ति से संबंधित शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए एक मजबूत शिकायत निवारण तंत्र विकसित करने और सूचना प्राप्त होते ही तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
प्रमुख निर्देश और उपाय:
- शासन द्वारा जारी एसओपी का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश।
- सभी नगरीय निकायों में जल वितरण प्रणाली का सात दिनों के भीतर सर्वेक्षण।
- 20 वर्ष से अधिक पुरानी या बार-बार लीकेज होने वाली पाइपलाइनों का चिन्हांकन।
- नालियों अथवा सीवर लाइनों के समीप से गुजरने वाली पाइपलाइनों की जांच और रिसाव पाए जाने पर 48 घंटे के भीतर मरम्मत।
- जल शोधन संयंत्रों और उच्च स्तरीय टंकियों की सफाई सात दिनों में पूर्ण कराई जाए।
कलेक्टर ने सभी जल शोधन संयंत्रों, प्रमुख जल स्रोतों, और उच्च स्तरीय टंकियों से तत्काल जल नमूना परीक्षण कराने के निर्देश दिए। प्रदूषण पाए जाने पर जल आपूर्ति रोककर वैकल्पिक सुरक्षित जल व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया। नगरीय क्षेत्रों के कुएं, बावड़ी, तालाब और नलकूपों में निर्धारित मानकों के अनुसार ब्लीचिंग पाउडर का उपयोग करने के निर्देश भी दिए गए।
जल गुणवत्ता निगरानी और जनजागरूकता:
- जल शोधन संयंत्रों एवं जल परीक्षण प्रयोगशालाओं में आवश्यक रसायन और उपकरणों की पर्याप्त उपलब्धता।
- क्लोरिनेशन सिस्टम की 24×7 निगरानी सुनिश्चित करना।
- जल गुणवत्ता की नियमित जांच के लिए एनएबीएल अधिकृत लैब, मोबाइल लैब और पीएचई की प्रयोगशालाओं से समय-समय पर परीक्षण।
- पाइपलाइन लीकेज डिटेक्शन के लिए जनजागरूकता अभियान।
- सभी नगरीय निकायों में वार्डवार कम्यूनिकेशन प्लान तैयार करना।
कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि जल आपूर्ति से जुड़ी सभी शिकायतों को इमरजेंसी श्रेणी में रखते हुए 24 से 48 घंटे के भीतर अनिवार्य रूप से निराकरण किया जाए। सीएम हेल्पलाइन में दर्ज गंदे या दूषित पेयजल एवं सीवेज संबंधी शिकायतों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
बैठक में अपर कलेक्टर मनोज उपाध्याय, एसडीएम, पीओ डूडा, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग एवं जल निगम सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। विकासखंडों से एसडीएम, जनपद सीईओ और सीएमओ वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।
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