अनूपपुर। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की खांडा रामपुर खदान इन दिनों कोयला उत्पादन से अधिक वहां व्याप्त भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के लिए चर्चा में है। खदान के भीतर सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हुए बाहरी मजदूरों का जमावड़ा और तकनीकी निरीक्षक की मिलीभगत से अवैध धन उगाही का तंत्र विकसित हो चुका है।

सुरक्षा में बड़ी चूक: बाहरी लोगों की अवैध दस्तक

खदान के भीतर केवल अधिकृत कर्मचारियों और पास धारकों को ही प्रवेश की अनुमति होती है। बावजूद इसके, खांडा रामपुर खदान में बाहरी मजदूरों का जमावड़ा सवाल उठाता है कि इसका जिम्मेदार कौन है? सुरक्षा प्रहरियों और प्रबंधन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

कोयला छंटाई में भ्रष्टाचार: स्टीम और सर्रा के अलग रेट

खदान से निकलने वाले 'रनिंग ऑफ माइंस' (ROM) कोयले की छंटाई में भ्रष्टाचार चरम पर है। स्टीम कोयले का ₹70 प्रति टन और सर्रा का ₹40 प्रति टन वसूला जा रहा है। यह वसूली निजी स्वार्थ के लिए हो रही है, जिससे राजस्व की हानि के साथ कोयले की ग्रेडिंग में भी हेरफेर की आशंका है।

पार्किंग के नाम पर जबरन वसूली

SECL की जमीन पर वाहनों से पार्किंग शुल्क वसूला जा रहा है। ट्रक चालकों का आरोप है कि बिना पैसे दिए खदान परिसर में वाहन खड़ा करना असंभव हो गया है।

तकनीकी निरीक्षक की भूमिका पर सवाल

तकनीकी निरीक्षक जितेंद्र पांडेय पर आरोप है कि वह इस अवैध वसूली में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। खदान के भीतर क्या चल रहा है, इसकी पूरी जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई न करना उनकी संलिप्तता की ओर इशारा करता है।

मुख्य चिंताएं और उठते सवाल:

  • सुरक्षा: खदान में दुर्घटना की स्थिति में अनधिकृत मजदूरों की जिम्मेदारी कौन लेगा?
  • राजस्व की हानि: वसूली की राशि किसके संरक्षण में और किसकी जेब में जा रही है?
  • प्रशासनिक मौन: SECL के उच्च अधिकारियों ने अब तक इस लूट पर संज्ञान क्यों नहीं लिया?

खांडा रामपुर खदान में चल रहा यह खेल कोयला माफिया और भ्रष्ट अधिकारियों के गठजोड़ का प्रमाण है। यदि जल्द ही इस पर लगाम नहीं कसी गई, तो यह सरकार के राजस्व को चपत लगाने के साथ-साथ बड़ी औद्योगिक दुर्घटना का कारण भी बन सकता है।