बैतूल: बैतूल की कृषि उपज मंडी में भ्रष्टाचार की स्थिति चरम पर है। व्यापारियों की मनमानी और प्रशासन की अनदेखी के चलते किसानों को लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है। मंडी शेड में किसानों की उपज के बजाय व्यापारियों के बोरे भरे रहते हैं, जिससे किसानों को अपनी उपज खुले में रखना पड़ता है। यह स्थिति खराब मौसम में उनकी उपज को नुकसान पहुंचाती है।

व्यापारियों की लापरवाही पर प्रशासन मौन

मंडी कानून के तहत व्यापारियों को 24 घंटे के भीतर बोरे उठाना आवश्यक है, लेकिन अक्सर इसका पालन नहीं होता। नियमों के उल्लंघन पर जुर्माने का प्रावधान होते हुए भी प्रशासन की उदासीनता के चलते स्थिति जस की तस बनी हुई है।

मंडी में 'झाड़ू प्रथा' से हो रही है लूट

मंडी में वर्षों से चली आ रही 'झाड़ू प्रथा' के कारण प्रतिदिन 40-50 हजार रुपए का अनाज किसानों से जबरन लिया जा रहा है। यह प्रथा किसानों के हक पर डाका डालने के समान है, लेकिन प्रशासन का इस पर कोई ध्यान नहीं है।

सिक्यूरिटी गार्ड्स की गैरमौजूदगी

मंडी में 30 सिक्यूरिटी गार्ड्स की नियुक्ति के बावजूद केवल 15 ही ड्यूटी पर दिखते हैं। शेष गार्ड्स मंडी सचिव और अन्य अधिकारियों के घरों पर काम करते हैं। इस कारण मंडी में आवारा मवेशियों से उपज को नुकसान होता है और चोरी की घटनाएं भी बढ़ रही हैं।

कदम-कदम पर किसान हो रहे हैं लुटे

  • गेट पर प्रवेश शुल्क से लेकर हम्माल और तुलावटी तक हर जगह किसान से पैसे लिए जाते हैं।
  • व्यापारियों के मुनीम भी उनसे अतिरिक्त शुल्क वसूलते हैं।
  • भुगतान के दौरान 1% तक की कटौती की जाती है, जबकि 24 घंटे में भुगतान का नियम है।

यह स्थिति दर्शाती है कि मंडी की कार्यप्रणाली में सुधार की तत्काल आवश्यकता है। प्रशासनिक जागरूकता और कड़ी निगरानी से ही किसानों के साथ हो रहे अन्याय को रोका जा सकता है।