सिवनी- : आजादी के 75 साल से अधिक और विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच सिवनी जिले के घंसौर विकासखंड का दमपुरी गांव आज भी एक पुल के लिए तरस रहा है। वर्ष 2010 में पुल बह जाने के बाद से पिछले 17 वर्षों से ग्रामीण प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन आज तक नया पुल नहीं बन सका। नतीजा यह है कि बरसात शुरू होते ही करीब 150 परिवारों का संपर्क बाहरी दुनिया से टूट जाता है।

 

बरसात आते ही बढ़ जाती है मुसीबत

 
घंसौर मुख्यालय से लगभग 52 किलोमीटर दूर स्थित दमपुरी गांव का मुख्य मार्ग एक नाले से होकर गुजरता है। गर्मियों में लोग किसी तरह नाला पार कर लेते हैं, लेकिन बारिश में तेज बहाव के कारण घंटों तक आवागमन पूरी तरह बंद हो जाता है। ऐसे में ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नाला पार करने को मजबूर होते हैं।
 

लाखों की लागत से बना पुल पहली बारिश में बह गया

 
ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2009 में सिंचाई विभाग ने लाखों रुपये खर्च कर पुल का निर्माण कराया था, लेकिन वर्ष 2010 की पहली तेज बारिश में ही पुल बह गया। इसके बाद से आज तक न तो पुल का पुनर्निर्माण हुआ और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई।
 

स्कूल जाने वाले बच्चे और मरीज सबसे ज्यादा परेशान

 
गांव के एक ओर आंगनबाड़ी केंद्र और दूसरी ओर प्राथमिक विद्यालय स्थित है। रोज छोटे-छोटे बच्चों को नाला पार कर स्कूल जाना पड़ता है। बारिश के दिनों में कई बार उनकी पढ़ाई पूरी तरह ठप हो जाती है।
 
स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी गंभीर है। एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती। किसी मरीज या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना हो तो पहले नाला पार कराना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि हर बारिश के मौसम में किसी बड़े हादसे का डर बना रहता है।
 

आवेदन, शिकायत और भूख हड़ताल... फिर भी नहीं बना पुल

 
ग्रामीणों ने वर्षों में कई बार जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों को आवेदन दिए। भोपाल तक शिकायत पहुंचाई गई और भूख हड़ताल भी की गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। निर्माण कार्य आज तक शुरू नहीं हो सका।
 

अधिकारी बोले—प्रस्ताव भेजा गया है

 
जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आकाश जैन ने बताया कि पुल निर्माण का प्रस्ताव संबंधित विभाग और जिला मुख्यालय भेजा जा चुका है तथा अगले वर्ष स्वीकृति मिलने की उम्मीद है। वहीं अनुविभागीय अधिकारी बिशन सिंह का कहना है कि सिंचाई विभाग और पीआईयू से लगातार समन्वय किया जा रहा है और आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर जल्द निर्माण शुरू कराने का प्रयास किया जा रहा है।
 

सवाल अब भी बरकरार

 
जब वर्ष 2010 में पुल बह गया था तो 17 वर्षों तक नया पुल क्यों नहीं बन सका? करोड़ों रुपये की विकास योजनाओं के बीच आखिर दमपुरी जैसे गांवों की बुनियादी जरूरतें कब पूरी होंगी? क्या ग्रामीणों को हर बरसात में अपनी जान जोखिम में डालकर नाला पार करना ही उनकी नियति बनी रहेगी, या इस बार प्रशासन के आश्वासन धरातल पर उतरेंगे?
 
फिलहाल, दमपुरी के ग्रामीणों की सिर्फ एक मांग है—एक मजबूत पुल, ताकि बच्चों की पढ़ाई, मरीजों की जिंदगी और गांव का भविष्य सुरक्षित हो सके।