सीहोर: मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी के कारण हुई मौतों के बाद प्रदेश में हड़कंप मच गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर पूरे प्रदेश में पानी की जांच की जा रही है। लेकिन सीहोर में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। जिला मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर दूर भाऊखेड़ी और कांकड़खेड़ा स्थित अल्फा प्रोटीन फैक्ट्री से निकलता दूषित पानी ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच रहा है, जो गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस दूषित पानी के कारण गांवों में खुजली और अन्य बीमारियां फैल रही हैं, लेकिन प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा। यह फैक्ट्री सीहोर-नसरुल्लागंज स्टेट हाईवे पर स्थित है, जिस पर प्रशासनिक अधिकारी भी नियमित रूप से आते-जाते रहते हैं।
जब इस मामले को सीहोर के कलेक्टर बालागुरु के. के संज्ञान में लाया गया, तो उनका बयान हैरान करने वाला था। उन्होंने कहा, "मैं कलेक्टर हूं और मेरे पास बहुत सारे काम हैं।" इससे साफ जाहिर होता है कि जिले के नागरिकों की चिंता उन्हें नहीं है।
इछावर एसडीएम और तहसीलदार से भी बातचीत की कोशिश की गई, लेकिन उनके बयान भी निराशाजनक थे। किसी ने बाहर का बहाना बनाया तो किसी ने कहा कि वे वाइट या बयान देने के लिए अधिकृत नहीं हैं। सवाल यह उठता है कि ये अधिकारी अल्फा प्रोटीन फैक्ट्री के मामले में कैमरे के सामने आने से क्यों कतरा रहे हैं?
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