*ज्ञापन लेने नहीं पहुंचे अधिकारी, किसान रैली धरने में बदली; 12 घंटे बाद रात 11 बजे पहुंचा प्रशासन*
*बैलगाड़ी रैली से शुरू हुआ आंदोलन, एसडीएम कार्यालय के बाहर डटे रहे हजारों किसान और कांग्रेसी*

मानपुर, उमरिया। किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मानपुर के तत्वावधान में सोमवार को आयोजित किसान रैली प्रशासनिक टकराव के बीच देर रात तक चले धरने में बदल गई। ग्रामीण खेल मैदान मानपुर से शुरू हुई रैली का नेतृत्व कांग्रेस केंद्रीय वर्किंग कमेटी के सदस्य कमलेश्वर पटेल, प्रदेश कांग्रेस महासचिव फुंदेलाल सिंह और जिला कांग्रेस अध्यक्ष इंजीनियर विजय कोल ने किया। बैलगाड़ी में सवार नेताओं के साथ हजारों की संख्या में किसान, महिलाएं, युवा और बुजुर्ग हाथों में कांग्रेस के झंडे और मांगों से लिखी दफ्तियां लेकर गांधीवादी तरीके से "जय जवान-जय किसान" और "कांग्रेस पार्टी जिंदाबाद" के नारे लगाते हुए बस स्टैंड स्थित सभा स्थल पहुंचे।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा जाना था, लेकिन कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) मानपुर निर्धारित स्थल पर ज्ञापन लेने नहीं पहुंचीं। इसके विरोध में कमलेश्वर पटेल, फुंदेलाल सिंह और इंजीनियर विजय कोल के नेतृत्व में हजारों कार्यकर्ता और किसान करीब 40 डिग्री तापमान के बीच पैदल मार्च करते हुए एसडीएम कार्यालय पहुंच गए। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया।
एसडीएम कार्यालय के बाहर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने धरना शुरू कर दिया। इसी दौरान एसडीएम हरनीत कौर स्वयं कार्यालय से बाहर आकर ज्ञापन लेने पहुंचीं, लेकिन कांग्रेस नेताओं ने ज्ञापन सौंपने से इनकार कर दिया। नेताओं का कहना था कि यदि अधिकारी वातानुकूलित कार्यालय से निकलकर दो किलोमीटर दूर बस स्टैंड तक नहीं पहुंच सकतीं, तो 40 डिग्री की भीषण गर्मी में किसानों के साथ पैदल चलकर आए लोग अब ज्ञापन सीधे जिला कलेक्टर को ही सौंपेंगे। इस दौरान अधिकारियों और कांग्रेस नेताओं के बीच तीखी बहस भी हुई।
धरने पर बैठे कार्यकर्ताओं ने "रघुपति राघव राजा राम" का भजन गाते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रखा और किसानों को खाद-बीज, डीजल-पेट्रोल और टोकन व्यवस्था की समस्याओं से राहत दिलाने की मांग को लेकर नारेबाजी की। करीब 12 घंटे तक चले गतिरोध के बाद रात 11 बजे जिला कलेक्टर के प्रतिनिधि के रूप में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभय सिंह ओरिया मौके पर पहुंचे, जिसके बाद राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन में डीजल-पेट्रोल की बढ़ी कीमतें वापस लेने, खाद वितरण में टोकन व्यवस्था समाप्त करने, डीएपी और यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता, फसल बीमा, 24 घंटे बिजली आपूर्ति, बिजली बिल में राहत तथा कृषि यंत्रों को जीएसटी मुक्त करने सहित विभिन्न मांगें रखी गईं।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष की भूमिका को कमजोर करने और जनआंदोलनों की धार को कुंद करने के लिए प्रशासनिक तंत्र का इस्तेमाल किया जा रहा है। नेताओं का कहना था कि किसानों की समस्याओं को सुनने के बजाय विरोध की आवाज को अनदेखा करने का प्रयास किया गया, जिसके कारण शांतिपूर्ण कार्यक्रम देर रात तक चले आंदोलन में तब्दील हो गया। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर प्रशासन का आधिकारिक पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है।
इनकी रही प्रमुख उपस्थिति
उमाशंकर पटेल, पुष्पराज सिंह, अंजू सिंह, शारदा प्रसाद गौतम, ओपी द्विवेदी, ओंकार सिंह बबलू, सावित्री सिंह, रामगोपाल दहिया, तिलकराज सिंह, राहुल देव सिंह, गजेंद्र शुक्ला ,वीरेंद्र सिंह, अंबुज सिंह,मनीष सिंह बड़करे ,माया सिंह, ऊषा कोल,अनीता सिंह, रोशनी सिंह, बेटी बाई रजक, गौरीशंकर मिश्रा, मिथलेश राय संजीव खंडेलवाल, जानकी प्रसाद मिश्रा, विजय सिंह परिहार के के प्यासी,विजय गौतम, दिलीप चतुर्वेदी,पी डी प्रभाकर ,ज्ञान प्रकाश पटेल, रतीभान सिंह, अमर बहादुर सिंह, रवि सेन, भोला पटेल, ऋतिक प्यासी, के.के. प्यासी, पंकज गौतम, कुश परिहार, सीताराम चौधरी , रामकिंकर पाल ,राम नरेश सिंह,अमृतलाल पाल, रामप्रकाश पटेल, सुशील पटेल, राजेंद्र शुक्ला, संतोष सिंह, शेख आशिक, सलीम खान, रोशन खान, भगवती द्विवेदी, पंकज द्विवेदी अजय सोमवंशी ,सहित सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता, महिला पदाधिकारी एवं क्षेत्र के किसान बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।