कदमताल में दिखी आदिवासी संस्कृति की ताकत
विश्व आदिवासी दिवस पर ‘आदिवासी जेन झी’ का अनुशासित चल समारोह, युवाओं ने दिया संस्कृति-संरक्षण का संदेश

कठ्ठीवाड़ा। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर कठ्ठीवाड़ा में आदिवासी जेन झी ने संयम, अनुशासन और ऊर्जा के साथ कदमताल करते हुए आदिवासी संस्कृति, परंपरा और गौरवशाली धरोहर की अद्भुत छवि प्रस्तुत की। पारंपरिक वेशभूषा में सजे युवक-युवतियों की जोशीली सहभागिता ने पूरे आयोजन को आकर्षक बना दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत क्रांतिसूर्य भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुई। इसके बाद धनार माता मंदिर परिसर से आदिवासी दिवस का चल समारोह प्रारंभ हुआ। तेज संगीत की धुन पर थिरकते युवा अपनी एकता, परंपरागत पहनावे और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का संदेश देते हुए आगे बढ़े। पूरे रास्ते युवक-युवतियां लय और ताल के साथ अनुशासित कदमताल करते नजर आए।
अलग-अलग समूहों में निकला चल समारोह
इस बार आदिवासी दिवस का चल समारोह एक साथ निकलने के बजाय अलग-अलग समूहों में आयोजित किया गया। विभिन्न समूह पारंपरिक नृत्य और वाद्ययंत्रों के साथ आगे बढ़ते हुए कवछा स्थित टंकी मैदान पहुंचे। युवाओं की ऊर्जा और पारंपरिक रंगों से सजा यह दृश्य आदिवासी संस्कृति की जीवंत तस्वीर पेश कर रहा था।
समारोह में आदिवासी जेन झी के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं, सर्विस क्लास, जनप्रतिनिधि और आदिवासी समाजजन शामिल हुए। आयोजन के दौरान संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता को मजबूत करने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में पारसिंह बारिया, सुनील कनेश, जनरल चौहान, वरसिंह बारिया, संपत धाकड़, अर्जुन चौहान, कनसिंह चौहान, छगन डावर, सुरेश अजनार सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं एवं समाजजनों ने सहभागिता की।