बुधनी वन परिक्षेत्र के भीमकोठी क्षेत्र के जंगल में गुरुवार को एक बाघ का शव मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया। घटना की सूचना मिलते ही विभाग की टीम मौके पर पहुंची और उच्च अधिकारियों को सूचित किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए टाइगर रिजर्व के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम को भी घटनास्थल पर बुलाया गया। मौके पर रेंजर, एसडीओ, डीएफओ सहित वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। डॉक्टरों की टीम ने मौके पर ही बाघ के शव का परीक्षण किया और मौत के कारणों की गहन जांच शुरू कर दी गई।
वन परिक्षेत्र अधिकारी, राजित द्विवेदी ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों और वन्यजीव चिकित्सकों की मौजूदगी में बाघ का पोस्टमार्टम किया जाएगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा। नियमानुसार पोस्टमार्टम के बाद बाघ का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
लगातार हो रही वन्यजीवों की मौतें
यह कोई पहला मामला नहीं है। इसी क्षेत्र में पहले भी करीब एक दर्जन जंगली जानवरों की मौत हो चुकी है, जिनमें बाघ और तेंदुए जैसे संरक्षित वन्यजीव शामिल हैं। इसके बावजूद वन विभाग की निगरानी व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोग और वन्यजीव प्रेमी कहते हैं कि क्षेत्र में अवैध गतिविधियों, लापरवाही और कमजोर मॉनिटरिंग के कारण लगातार वन्यजीवों की मौतें हो रही हैं। हर बार जांच की बात कहकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।
अब एक बार फिर बाघ की संदिग्ध मौत ने वन विभाग की कार्यप्रणाली और वन्यजीव संरक्षण के दावों पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। सभी की निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि यह मौत प्राकृतिक है या इसके पीछे कोई गहरी साजिश छिपी है।
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