सिवनी -:

घंसौर थाना परिसर में लगी आग अब केवल एक सामान्य आगजनी की घटना नहीं रह गई है, बल्कि इसने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था और रिकॉर्ड संरक्षण को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आग में न केवल महत्वपूर्ण कागजी दस्तावेज जलकर राख हो गए, बल्कि थाने में रखे कम्प्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी आग की चपेट में आ गए, जिससे पूरे मामले ने और अधिक गंभीर रूप ले लिया है।
जानकारी के अनुसार आग लगने से थाने में वर्षों से सुरक्षित रखे गए अभिलेख, केस संबंधी दस्तावेज और कम्प्यूटर सिस्टम प्रभावित हुए हैं। ऐसे में अब यह सवाल भी उठने लगा है कि यदि कम्प्यूटर भी जल गए हैं तो उनमें सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड का क्या हुआ? आखिर यह केवल संयोग है या फिर किसी महत्वपूर्ण जानकारी को हमेशा के लिए समाप्त करने की कोशिश?

क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है कि आग ने केवल कागजों को ही नहीं बल्कि डिजिटल डेटा को भी निशाना बनाया है। लोगों का कहना है कि वर्तमान समय में अधिकांश महत्वपूर्ण सूचनाएं कम्प्यूटरों में सुरक्षित रहती हैं। ऐसे में कम्प्यूटरों का आग की चपेट में आना कई नई आशंकाओं को जन्म दे रहा है।

हालांकि आग लगने के कारणों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन घटना के बाद यह सवाल लगातार उठ रहा है कि कहीं कागजी दस्तावेजों के साथ-साथ डिजिटल रिकॉर्ड को भी खत्म करने का प्रयास तो नहीं किया गया? यह केवल एक आशंका है, जिसकी पुष्टि निष्पक्ष जांच के बाद ही हो सकेगी, लेकिन घटना ने संदेहों को जरूर जन्म दिया है।

*जनता पूछ रही है ये सवाल*

थाना परिसर में आग आखिर लगी कैसे?

आग की शुरुआत कहां से हुई?

जब आग लग रही थी तब ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी क्या कर रहे थे?

आग की सूचना समय पर क्यों नहीं मिल सकी?

आग में कौन-कौन से रिकॉर्ड नष्ट हुए?

क्या किसी महत्वपूर्ण या संवेदनशील मामले की फाइलें भी प्रभावित हुई हैं?

कम्प्यूटरों में सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड का क्या हुआ?

क्या डिजिटल डेटा का बैकअप मौजूद है?

क्या सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित हैं?

कहीं कागजी और डिजिटल दोनों प्रकार के रिकॉर्ड को समाप्त करने का प्रयास तो नहीं किया गया?

"जब थाना ही सुरक्षित नहीं, तो जनता की सुरक्षा का भरोसा कैसे?"

घटना के बाद आम लोगों में यह सवाल भी गूंज रहा है कि जब पुलिस अपने ही थाने, सरकारी दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की सुरक्षा नहीं कर पा रही है, तो क्षेत्र की कानून-व्यवस्था और जनता की सुरक्षा को लेकर भरोसा कैसे कायम रहेगा?

घंसौर थाना आगजनी की यह घटना अब केवल आग लगने तक सीमित नहीं रह गई है। यह प्रशासनिक जवाबदेही, सुरक्षा व्यवस्था और रिकॉर्ड संरक्षण की परीक्षा बन चुकी है। जनता निष्पक्ष जांच की मांग कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह महज एक हादसा था, किसी की लापरवाही का परिणाम था या फिर किसी महत्वपूर्ण सच्चाई को राख में बदलने की कोशिश। फिलहाल पूरे मामले पर क्षेत्रवासियों की निगाहें टिकी हुई हैं और सभी को जांच के निष्कर्ष का इंतजार है।