बुधनी: 50 वर्षों से राजस्व भूमि पर मकान बनाकर रह रहे लोगों को रेलवे विभाग द्वारा अतिक्रमण हटाने के नोटिस दिए जाने का मामला सामने आया है, जिसने क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। प्रभावित रहवासियों ने इस नोटिस के विरोध में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व डी.एस. तोमर के नाम ज्ञापन सौंपा। एसडीएम की अनुपस्थिति में यह ज्ञापन तहसीलदार बुधनी को दिया गया।
मामले का विवरण:
- रहवासियों का दावा है कि जिस भूमि पर वे निवास कर रहे हैं, वह राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है।
- रेलवे विभाग द्वारा दी गई नोटिसों का आधार स्पष्ट नहीं है क्योंकि यह भूमि रेलवे की बाउंड्री से काफी दूर स्थित है।
- पूर्व में इस भूमि की जांच हो चुकी है, जिसमें इसे राजस्व भूमि पाया गया था।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि पहले भी रेलवे विभाग अपनी भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर चुका है। लेकिन इस बार जिन मकानों को नोटिस दिया गया है, वह भूमि रेलवे की नहीं, बल्कि राजस्व विभाग की है।
रहवासियों ने वर्ष 1991 में तहसीलदार बुधनी द्वारा जारी किए गए नोटिसों का भी हवाला दिया, जिसमें राजस्व भूमि पर अतिक्रमण के संबंध में जुर्माना लगाया गया था। इससे स्पष्ट होता है कि भूमि राजस्व विभाग की है, न कि रेलवे की।
रहवासियों की मांगें:
- रेलवे द्वारा जारी किए गए अतिक्रमण नोटिस को तत्काल निरस्त किया जाए।
- वर्षों से बसे परिवारों को बेवजह परेशान न किया जाए।
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