उपसरपंच ने सौंपे शिकायत और वीडियो साक्ष्य, जांच की उठी मांग
बल्देवगढ़। जनपद पंचायत बल्देवगढ़ की ग्राम पंचायत गुखरई में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं का गंभीर मामला सामने आया है। पंचायत में नया चबूतरा निर्माण दर्शाकर करीब 1.40 लाख रुपये की राशि आहरित किए जाने तथा नाली निर्माण में मजदूरों के स्थान पर जेसीबी मशीन का उपयोग करने के आरोप लगे हैं। मामले को लेकर उपसरपंच रामकिशन लोधी ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी सीईओ को लिखित शिकायत सौंपते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के अनुसार पंचायत में करीब 1.40 लाख रुपये की लागत से नए चबूतरे का निर्माण स्वीकृत किया गया था, लेकिन मौके पर नया निर्माण कराने के बजाय पहले से बने पुराने चबूतरे पर केवल सफेदी और रंग-रोगन कराकर उसे नया निर्माण दर्शा दिया गया। आरोप है कि इसके बाद पूरी शासकीय राशि निकाल ली गई। यदि शिकायत सही पाई जाती है तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला माना जाएगा।
मामले का दूसरा पहलू नाली निर्माण कार्य से जुड़ा है। उपसरपंच ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य में मजदूरों को रोजगार देने के बजाय जेसीबी मशीन से खुदाई कराई गई। उन्होंने दावा किया है कि उनके पास इसके वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं, जिन्हें वे जांच के दौरान प्रस्तुत करेंगे। इससे मनरेगा और श्रम आधारित कार्यों की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
शिकायत में निर्माण कार्यों की तकनीकी निगरानी करने वाले उपयंत्री की भूमिका पर भी प्रश्नचिह्न लगाए गए हैं। उपसरपंच का कहना है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता, माप पुस्तिका और भुगतान संबंधी अभिलेखों की गहन जांच कराई जानी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि भुगतान किन परिस्थितियों में और किस आधार पर किया गया।
उपसरपंच ने प्रशासन से मांग की है कि स्वीकृत चबूतरे की मौके पर भौतिक जांच कराई जाए, नाली निर्माण कार्य के समस्त दस्तावेजों की स्क्रूटनी की जाए तथा यदि अनियमितताएं सिद्ध होती हैं तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर उनके विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
ग्राम पंचायत गुखरई में सामने आए इस कथित फर्जीवाड़े ने एक बार फिर पंचायतों में विकास कार्यों की निगरानी और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं कि शिकायत के बाद जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है या मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में सिमटकर रह जाता है।
Continue With Google
Comments (0)