पूर्व भाजपा जिला महामंत्री कैलाश सिंह मरावी ने कलेक्टर को लिखा पत्र

अनूपपुर जिले के जैतहरी नगर में स्थित लगभग सात-आठ दशक पुराने जर्जर पुलिस सर्किल क्वार्टर को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल खड़े हो गए हैं। 
भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिला महामंत्री एवं कृषि उपज मंडी जैतहरी के पूर्व अध्यक्ष कैलाश सिंह मरावी ने कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी को पत्र लिखकर इस गंभीर मुद्दे पर त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
अपने पत्र में मरावी ने उल्लेख किया है कि कलेक्टर कार्यालय द्वारा जुलाई 2024 में जारी आदेश के तहत लोक निर्माण विभाग की अनुपयुक्तता रिपोर्ट के आधार पर जिले के जर्जर भवनों को ध्वस्त कर समतलीकरण की अनुमति दी गई थी। इस आदेश के पालन में जैतहरी नगर के कई भवन—जैसे मिडिल स्कूल (वार्ड 10), वन विभाग निरीक्षण कुटीर (वार्ड 6) तथा प्राथमिक स्कूल मनागंज (वार्ड 11)—को कई माह पूर्व ही तोड़कर समतल कर दिया गया।

हालांकि, इसी क्रम में जैतहरी के वार्ड क्रमांक 10 स्थित मुख्य मार्ग पर बने पुलिस सर्किल क्वार्टर को लेकर स्थिति अब भी जस की तस बनी हुई है। मरावी का आरोप है कि नगर परिषद जैतहरी के मुख्य नगरपालिका अधिकारी द्वारा पिछले लगभग एक वर्ष में नगर निरीक्षक, थाना जैतहरी एवं पुलिस अधीक्षक अनूपपुर को कई पत्र लिखे जाने के बावजूद अब तक इस जर्जर भवन को हटाने की सहमति नहीं दी गई है।

उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि “कानून के रखवाले ही यदि कलेक्टर के आदेश की अनदेखी करें, तो यह व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।” पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रदेश में हाल ही में हुई दुर्घटनाओं के मद्देनज़र ऐसे जर्जर भवन किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं।

विशेष रूप से चिंता का विषय यह है कि यह जर्जर पुलिस क्वार्टर उत्कृष्ट बालक हायर सेकेंड्री स्कूल के समीप तथा अहिंसा चौक जैसे व्यस्त मुख्य मार्ग पर स्थित है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र एवं आम नागरिकों का आवागमन रहता है। ऐसे में किसी अप्रिय घटना की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।

मरावी ने कलेक्टर से मांग की है कि जिले में जर्जर भवनों के ध्वस्तीकरण और समतलीकरण के आदेश का समान रूप से पालन सुनिश्चित कराया जाए, ताकि जनहित में संभावित दुर्घटनाओं से बचा जा सके।
इस मामले ने एक बार फिर प्रशासनिक समन्वय और जिम्मेदारी के सवाल को सामने ला दिया है, जहां एक ओर आदेश जारी होते हैं, वहीं दूसरी ओर उनके क्रियान्वयन में देरी जनसुरक्षा पर भारी पड़ सकती है।