मझौली अंचल में झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार, लोगों के सेहत व जान के साथ खिलवाड़।
झोलाछाप डॉक्टरो पर खाना पूर्ति तक सीमित रही जांच कार्यवाही,
मेडिकल में कार्यवाही ,बंगालियों पर रहम कौन है इसका जिम्मेदार।
जिम्मेदार क्यों कर रखे हैं नजर अंदाज, लोगों के बीच गरमाता जा रहा है चर्चा का बाजार।
मझौली/सीधी,
सीधी जिले के मझौली उपखंड अंतर्गत इस समय मौसम के बदलाव के साथ वायरल बुखार व अन्य बीमारियों का दिन प्रतिदिन प्रकोप बढ़ता जा रहा है क्षेत्र में डॉक्टर का अभाव बना हुआ है,झोलाछाप डॉक्टर गरीबों के जान के साथ खिलवाड़ करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ा रहे है बल्कि उनके खून पसीने की कमाई से ऐसो आराम की जिंदगी जी रहे हैं बता दें कि मझौली नगर परिषद सहित हर गांव कस्बे में झोलाछाप डॉक्टर क्लीनिक खोलकर लोगों की जान के साथ खिलवाड़ कर उनके खून पसीने की कमाई मनमानी रूप से लूट रहे हैं, भले ही दिखावे के लिए क्षेत्र के जो कुछ लोग मेडिकल सेंटर खोल अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हो उन पर कार्यवाही कर और कोरमपूर्त नाम मात्र कर लिए हो लेकिन दूसरे प्रदेशों से आकर लोगों के जान के साथ खिलवाड़ करने वाले जिनके पास ना तो कोई डिग्री है या नहीं डिप्लोमा है क्षेत्र के हर गांव में लूटपाट की दुकान खोले बैठे हैं जो 10-20 की गोली इंजेक्शन देकर 100 से 500 रूपये तक वसूल करते हैं लोगों की माने तो पथरी अपेंडिक्स बवासीर आदि खतरनाक बीमारियों का ऑपरेशन करने में भी परहेज नहीं कर रहे हैं ऐसी स्थिति में जिम्मेदार का इन्हें नजरअंदाज करना क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है जो शासन प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर रहा है क्षेत्र के कई गांवों में झोलाछाप डॉक्टर सक्रिय हैं जो मरीजों को सस्ती दवाई देकर मोटी रकम वसूल रहे हैं यहां तक कि कई झोलाछाप डॉक्टरों ने बकायदा बोर्ड भी लगा रखे हैं लेकिन डिग्री डिप्लोमा का कोई जिक्र नहीं किया जाता है कार्यवाही ना होने से इनके हौसले बुलंद होते जा रहे हैं, झोलाछाप डॉक्टरों पर अभियान चलाकर जिला एवं तहसील स्तर पर कोई कार्यवाही करने की जरूरत नहीं समझी जाती है लिहाजा आज स्थिति यह हो चुकी है कि शहरी क्षेत्रों से लेकर कस्बाई क्षेत्रों तक में झोलाछाप डॉक्टर क्लीनिक एवं पैथोलॉजी सेंटर का संचालन बेखौफ होकर कर रहे हैं। उनके यहां हजारों की कमाई रोजाना होने के कारण कई झोलाछाप डॉक्टर तो बड़े-बड़े बंगले बनवाने के साथ ही चार पहिया वाहन से चल रहे हैं झोलाछाप बंगालियों डॉक्टरों को यह अच्छे से मालूम है कि उनके ऊपर सीधी जिले में अधिकारी की मेहरबानी बनी हुई है मरीजों की सेहत के साथ कितना भी खिलवाड़ करें हजारों रुपए लेने के बाद ही मरीज की हालत में कोई सुधार ना हो फिर भी उनके ऊपर कोई कार्यवाही नहीं होती है। वही देखा जाए तो नगर परिषद में ही कई झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार है, जहा खंड प्रशासन बैठ रहा हो लेकिन वहां कार्यवाही न होना झोलाछाप डॉक्टर का हौसला बुलंद हैं अब देखना होगा कि खबर प्रशासन के बाद खंड या जिला प्रशासन क्या कुछ कार्यवाही कर पता है।
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