कान्हा ने खोया अपना सबसे बड़ा संरक्षक, नम आंखों से दी 

गई हेमेंद्र सिंह पंवार को श्रद्धांजलि

 

मंडला से प्रशांत पटैल 

 

मंडला। कान्हा की वादियों में शनिवार की सुबह एक अलग ही भावनात्मक माहौल देखने को मिला। जंगल की चिर-परिचित चहचहाहट के बीच खटिया गेट पर सन्नाटा पसरा था। गाइड, जिप्सी चालक, वनकर्मी और स्थानीय नागरिक एक कतार में खड़े होकर उस महान व्यक्तित्व को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे थे, जिसने कान्हा को दुनिया के मानचित्र पर विशिष्ट पहचान दिलाई। यह श्रद्धांजलि थी पद्म विभूषण से सम्मानित, विश्वविख्यात वन्यजीव विशेषज्ञ और कान्हा के सृजनकर्ता स्वर्गीय हेमेंद्र सिंह पंवार को।

 

श्रद्धांजलि सभा के दौरान अनेक लोगों की आंखें नम हो गईं। उपस्थित लोगों ने कहा कि पंवार साहब केवल एक अधिकारी नहीं थे, बल्कि प्रकृति और वन्यजीवों के सच्चे प्रहरी थे। उन्होंने अपने दूरदर्शी नेतृत्व और अथक प्रयासों से कान्हा को विश्वस्तरीय संरक्षण मॉडल के रूप में स्थापित किया। उनके कार्यों की बदौलत आज कान्हा टाइगर रिजर्व देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है।

 

वन विभाग में अपने कार्यकाल के दौरान वे 1 मार्च 1972 से 1 मार्च 1974 तक मंडला वनमंडल में डीएफओ तथा 1 मार्च 1974 से 26 मई 1981 तक कान्हा के फील्ड डायरेक्टर रहे। इस अवधि में उन्होंने वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और स्थानीय समुदायों के विकास के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक पहल कीं। उनके प्रयासों से न केवल वन्यजीवों को सुरक्षित आवास मिला, बल्कि हजारों स्थानीय परिवारों को रोजगार और सम्मानजनक जीवन का आधार भी प्राप्त हुआ।

 

कान्हा से जुड़े लोगों का कहना है कि आज भी बाघों की गर्जना, बारहसिंघों की छलांग और जंगल की हर पगडंडी में पंवार साहब के सपनों और संघर्षों की गूंज महसूस की जा सकती है। उन्होंने प्रकृति संरक्षण को केवल सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि जनभागीदारी का आंदोलन बनाया।

 

श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा को नमन किया। उस दौरान वातावरण इतना भावुक था कि कई लोगों की आंखों से आंसू छलक पड़े। सभी ने एक स्वर में कहा कि व्यक्ति भले ही इस संसार से विदा हो जाए, लेकिन उसके द्वारा किए गए महान कार्य और उसकी विरासत सदैव जीवित रहती है।

 

आज कान्हा का जंगल अपने उस महान संरक्षक को याद कर रहा है, जिसने अपना संपूर्ण जीवन वन्यजीवों, जंगलों और पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित कर दिया। प्रकृति के इस सच्चे साधक को कान्हा परिवार की ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई तथा ईश्वर से उनकी पुण्य आत्मा की शांति और शोकाकुल परिवार को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की गई।