हरे-भरे वनों, झरनों और नीले स्वच्छ बादलों से ढके पहाड़ों का सुंदर दृश्य प्रस्तुत करने वाला कट्ठीवाड़ा अब पर्यटकों के स्वागत में तैयार है। गुजरते वर्ष की स्मृतियों को संजोने और नए वर्ष के आगमन का स्वागत करने के लिए यहां गुजरात और मालवांचल से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं।

इस क्षेत्र के कुछ प्रमुख प्राकृतिक स्थल जैसे झरना, डुंगरीमाता, चाटलिया पानी, रतनमाल रीछ अभ्यारण्य, आधा शीशी, और थालिया उबड़ा घाट पर्यटकों को बरबस अपनी ओर खींच रहे हैं। यहां वनों की सैर और ट्रेकिंग का अद्वितीय अनुभव लिया जा सकता है। आइए जानते हैं इन प्रमुख स्थलों के बारे में:

झरना

कट्ठीवाड़ा से मात्र दो किमी की दूरी पर स्थित यह झरना अगस्त से नवंबर तक अपनी पूर्ण सुंदरता के साथ बहता है। दिसंबर में भी इसकी अद्भुत छटा पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती है।

डुंगरीमाता

कट्ठीवाड़ा से लगती पहाड़ी पर स्थित डुंगरीमाता एक सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थल हैं। यहां हरे-भरे वृक्षों के बीच बने प्राकृतिक मंदिर में माता की पारंपरिक प्रतिमाएं विराजित हैं। यहां से चारों ओर की हरे भरे वनांचल की मनोरम सुंदरता दिखाई देती है।

चाटलिया पानी

यह वन क्षेत्र कट्ठीवाड़ा से पांच किमी की दूरी पर स्थित है। यहां के सुरम्य वनों के बीच छोटा सा पानी का सोता बहता है, जिसका जल शिवमंदिर में शिव जी का अभिषेक करता रहता है। इस क्षेत्र में तेंदुआ, बंदर, खरगोश और मोर जैसे वन्य जीव भी देखे जा सकते हैं।

रतनमाल रीछ अभ्यारण्य

गोलंबा ग्राम में स्थित यह वन क्षेत्र कट्ठीवाड़ा से पांच किमी दूर है। यहां से रतनमाल की चढ़ाई पैदल की जा सकती है। गुजरात सरकार ने इस क्षेत्र में रीछ अभ्यारण्य और नाइट स्टे के लिए कुटिया भी बनाई हुई है।

आधा शीशी

कट्ठीवाड़ा से 12 किमी की दूरी पर स्थित आधा शीशी पहाड़ी पर्वतारोहियों के लिए एक आकर्षण का केंद्र है। यहां का शहद बहुत प्रसिद्ध है।

थालिया उबड़ा वन क्षेत्र

यहां की घुमावदार चौड़ी सड़कें और सागौन के पेड़ों से आती सरसराती हवाएं पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। यहां एक सेल्फी प्वाइंट भी है जहां पर्यटक विभिन्न मुद्राओं में सेल्फी लेते हैं।

कट्ठीवाड़ा अपने प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक धरोहर के साथ पर्यटकों का स्वागत कर रहा है, जिससे यह स्थान नए वर्ष के जश्न के लिए एक आदर्श गंतव्य बन गया है।