केसली में रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर निकली भव्य रैली, गूंज उठी राष्ट्रभक्ति की ध्वनि
केसली (सागर) - केसली में आज गोंडवाना साम्राज्य की महान शासिका और अद्वितीय शौर्य की प्रतीक रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस के अवसर पर अद्वितीय राष्ट्रभक्ति और गौरव का दृश्य देखने को मिला। आदिवासी समाज के नेतृत्व में सर्वसमाज और विभिन्न सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने मिलकर एक भव्य और ऐतिहासिक रैली का आयोजन किया, जिसमें हजारों लोग शामिल हुए।
मुख्य मार्गों से गुजरी भव्य रैली, नगर में थमी रफ्तार
रैली की शुरुआत केसली के निर्धारित बिंदु से हुई, जहाँ रानी दुर्गावती के चित्र पर माल्यार्पण और पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद रैली नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए रानी दुर्गावती चौक तक पहुंची, जहां रानी की भव्य प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई।
आकर्षण का केंद्र: रैली में पारंपरिक वेशभूषा में सजे युवा और महिलाएं लोक नृत्य करते हुए और रानी दुर्गावती के जयघोष लगाते हुए आकर्षण का केंद्र बने।
जनभागीदारी से भरी हुई रैली
इस गौरव यात्रा में केवल आदिवासी समाज ही नहीं, बल्कि नगर के व्यापारिक संगठनों, युवाओं और प्रबुद्ध नागरिकों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। जगह-जगह स्थानीय निवासियों द्वारा रैली का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया।
रानी दुर्गावती चौक पर हुआ समापन
नगर के मुख्य मार्गों का भ्रमण करते हुए विशाल रैली रानी दुर्गावती चौक पर समाप्त हुई। यहाँ स्थापित वीरांगना की प्रतिमा पर समाज के वरिष्ठ जनों, जनप्रतिनिधियों और युवाओं ने पुष्पांजलि अर्पित की और उनके अमर बलिदान को नमन किया।
वरिष्ठ जनों ने डाला इतिहास पर प्रकाश: "स्वाभिमान की प्रतिमूर्ति थीं रानी"
रैली के समापन अवसर पर आयोजित सभा में समाज के वरिष्ठ विचारकों और संगठन के प्रमुख कार्यकर्ताओं ने रानी दुर्गावती के जीवन, उनके अदम्य साहस और मुगलों के खिलाफ किए गए ऐतिहासिक संघर्ष पर विस्तार से प्रकाश डाला।
"रानी दुर्गावती केवल एक शासिका नहीं, बल्कि स्वाभिमान और नारी शक्ति की सर्वोच्च मिसाल थीं। उन्होंने विदेशी आक्रांताओं के सामने झुकने के बजाय मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग करना बेहतर समझा। आज की पीढ़ी को उनके जीवन से देशभक्ति और दृढ़ संकल्प की प्रेरणा लेनी चाहिए।" — मुख्य वक्ता (वरिष्ठ जन, आदिवासी समाज)
एकजुटता का संदेश
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने रैली को सफल बनाने के लिए नगर के सभी वर्गों, प्रशासन और विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे आयोजन समाज में एकता, समरसता और अपनी संस्कृति के प्रति गौरव की भावना को मजबूत करते हैं।
रैली में मुख्य रूप से भरतलाल गौंड, प्रहलाद सिंह, रजत दीवान (जयस जिलाध्यक्ष), विनोद गौंड, भारती भूपेंद्र सिंह, राजेश सोयाम, राजकुमार (भूरे सरपंच), वीरू दीवान, वंदन परते आदि सहित बड़ी संख्या में समाजजन एवं अन्य लोग शामिल रहे।
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