मध्य प्रदेश में भूमि अधिग्रहण मुआवजा नियमों में बदलाव: जनता से मांगे सुझाव

भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार भूमि अधिग्रहण के मुआवजे की गणना के नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी में है। 2013 के भू-अर्जन अधिनियम के तहत मुआवजे के 'फैक्टर' को तय करने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया है। इस प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आम जनता से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं।

मुद्दा क्या है?

सरकारी परियोजनाओं जैसे सड़क, बांध और उद्योग के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान मुआवजे की राशि को लेकर किसानों और भू-स्वामियों में असंतोष रहता है। मुआवजे का निर्धारण एक 'फैक्टर' के आधार पर होता है, जो बाजार मूल्य (कलेक्टर गाइडलाइन) को गुणा करने के काम आता है। इसी फैक्टर को न्यायसंगत बनाने के लिए सरकार सुझाव ले रही है।

सुझाव भेजने की प्रक्रिया

  • अंतिम तिथि: 30 जनवरी 2026
  • समय: शाम 5:00 बजे तक
  • ईमेल: [email protected]

नोट: नागरिक अपने सुझाव लिखित प्रारूप में ईमेल के माध्यम से भेज सकते हैं, जिसमें मुआवजे की गणना, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के अंतर और विस्थापन संबंधी समस्याओं पर अपनी राय शामिल कर सकते हैं।

महत्वपूर्ण क्यों है यह कदम?

  • उचित मुआवजा: 2013 के अधिनियम का मुख्य उद्देश्य प्रभावित परिवारों को बाजार दर से बेहतर मुआवजा दिलाना है।
  • पारदर्शिता: आम लोगों की भागीदारी से नीति निर्माण में विवादों की संभावना कम होगी।
  • विकास को गति: यदि मुआवजा नीति स्पष्ट और जनहित में होगी, तो सरकारी परियोजनाओं के लिए भूमि अर्जन की प्रक्रिया में तेजी आएगी।

समिति करेगी समीक्षा

प्राप्त सुझावों का विश्लेषण सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति करेगी। समिति यह देखेगी कि किस क्षेत्र (ग्रामीण या शहरी) के लिए क्या फैक्टर होना चाहिए, ताकि भू-स्वामी को उसकी संपत्ति का वास्तविक मूल्य मिल सके।