अखण्ड यादव 

बल्देवगढ़। जनपद पंचायत बल्देवगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत मझगुवां में पुलिया निर्माण कार्य के नाम पर हुए बहुचर्चित भ्रष्टाचार मामले में अब जांच पूरी हो चुकी है और दोषियों पर कार्रवाई की तैयारी तेज हो गई है। जनपद सीईओ निशांत भूरिया द्वारा मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व में जांच के आदेश दिए गए थे, जिसके बाद गठित टीम ने मौके पर पहुंचकर पूरे प्रकरण की बारीकी से जांच की।

जानकारी के अनुसार इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की गई थी, जिसमें सहायक यंत्री रोहित सागरिया, उपयंत्री प्रभात सिंह एवं सतीश उपाध्याय को शामिल किया गया था। जांच टीम को मझगुवां से सरकनपुर मार्ग पर स्वीकृत पुलिया निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति का परीक्षण करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

जांच टीम जब मौके पर पहुंची तो स्थिति चौंकाने वाली मिली। जिस पुलिया निर्माण कार्य के नाम पर लाखों रुपए खर्च दर्शाए गए थे, वहां एक भी निर्माण कार्य नहीं पाया गया। निर्माण सामग्री का कोई अता-पता नहीं था। इससे साफ हो गया कि पूरा कार्य सिर्फ कागजों में ही चल रहा है। मौके पर नहीं।

जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि करीब आठ माह पूर्व ही पुलिया निर्माण के नाम पर 5 लाख 9 हजार 500 रुपए की राशि आहरित कर ली गई थी, जबकि जमीनी स्तर पर कार्य शून्य है। यह सीधा-सीधा सरकारी धन के दुरुपयोग और सुनियोजित भ्रष्टाचार का मामला प्रतीत होता है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 में पांचवें राज्य वित्त आयोग योजना के तहत लगभग 6 लाख रुपए की लागत से इस पुलिया निर्माण कार्य को स्वीकृति प्रदान की गई थी। लेकिन जिम्मेदारों द्वारा योजना के उद्देश्य को दरकिनार करते हुए नियमों की अनदेखी कर राशि निकाल ली गई।

जांच टीम ने अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट जनपद सीईओ को सौंप दी है, जिसमें बिना कार्य कराए भुगतान किए जाने की पुष्टि की गई है। रिपोर्ट में संबंधित अधिकारियों एवं जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका भी चिन्हित की गई है, जिससे अब कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।

सूत्रों के अनुसार इस मामले में संबंधित सरपंच, सचिव सहित अन्य जिम्मेदारों पर न केवल विभागीय कार्रवाई की जाएगी, बल्कि आहरित की गई राशि की वसूली की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है। साथ ही प्रकरण में फर्जीवाड़ा और वित्तीय अनियमितता के चलते कानूनी कार्रवाई की भी संभावना जताई जा रही है।

मामले के उजागर होने और जांच में गड़बड़ियां सामने आने के बाद क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है। ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और वे लंबे समय से इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे थे। अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन इस बार दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करते हुए एक उदाहरण पेश करेगा, जिससे भविष्य में इस प्रकार के भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सके।