MOJO विशेष जांच

मध्य प्रदेश फाइल्स: ₹35,000 करोड़ का 'सिस्टम' लीक?

दिनांक: 12 फरवरी, 2026
स्थान: भोपाल, मध्य प्रदेश

"वे कहते हैं मुर्दे बोला नहीं करते..." लेकिन मध्य प्रदेश में, वे जमीन बेचते हैं, सरकारी मुआवजा लेते हैं और 'सिस्टम' का हिस्सा बन जाते हैं। पिछले 11 वर्षों (2015-2026) की हमारी पड़ताल से जो सामने आया है, वह केवल भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि विश्वासघात है। परिवहन से लेकर राजस्व तक, हर फाइल में एक ही कहानी है—₹35,000 करोड़ से अधिक की लूट।

कुल अनुमानित घोटाला
₹35,000+
करोड़ (अनुमानित)
सबसे चौंकाने वाला सच
47 = 280
47 मृतकों के नाम पर 280 क्लेम
प्रभावित क्षेत्र
17+
मध्य प्रदेश के प्रमुख जिले
1. आर्थिक अनियमितताओं का लेखा-जोखा

आंकड़े झूठ नहीं बोलते। नीचे दी गई सारणी और ग्राफ विभिन्न विभागों में जनता के पैसे और भरोसे की लूट की कहानी कहते हैं。

विभाग अनियमितता की श्रेणी प्रभाव (₹ Cr) स्रोत
परिवहन विभाग विभागीय घोटाला आरोप 20,700 इंडिया टीवी (दिसंबर 2024)
शहरी विकास अवैध कॉलोनियां 15,650 एमपी समाचार पत्र (2024-26)
राजस्व विभाग भूमि पुनर्वर्गीकरण घोटाला 6,000 पत्रिका (12 फरवरी 2026)
राजस्व विभाग CAG ऑडिट आपत्तियां 4,712 कैग रिपोर्ट (मार्च 2019)
रेरा (RERA) कमजोर प्रवर्तन 1,000+ अमर उजाला (सितंबर 2024)
नगर निगम बीएमसी मुख्यालय निर्माण 532 ईटीवी भारत (अप्रैल 2025)
राजस्व (सिवनी) 'घोस्ट बेनिफिशरी' (मृतकों के नाम पर पैसा) 11.26 इंडिया टुडे (22 मई 2025)
स्रोत: इंडिया टीवी, द प्रिंट, पत्रिका, कैग रिपोर्ट्स, इंडिया टुडे (2019-2026)

ग्राफ: विभिन्न विभागों में अनुमानित वित्तीय प्रभाव (करोड़ रुपये में)

2. अवैध कॉलोनियों का बढ़ता दायरा

टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNCP) विभाग की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए, अवैध कॉलोनियां लगातार बढ़ रही हैं।

1,904

नई अवैध कॉलोनियां (2016-2024)


2016 (आधार): 6,077
2024 (वर्तमान): 7,981
चिंतनीय तथ्य: भोपाल में कार्रवाई के बजाय 238 कॉलोनियों के नाम रिकॉर्ड से हटा दिए गए (दैनिक भास्कर, 2026)।
3. रेरा (RERA): रक्षक या मूकदर्शक?

घर खरीदारों के हितों की रक्षा करने वाला विनियामक खुद सवालों के घेरे में है。

4,927
पंजीकृत प्रोजेक्ट्स
5,500+
कुल शिकायतें
4. सिवनी 'सर्पदंश' घोटाला

भ्रष्टाचार की एनाटॉमी: यहाँ जीवित इंसानों को कागजों में बार-बार मारा गया (मई 2025)।

कुल झूठे दावे 280 (मुआवजे के लिए)
पहचान (Identity) केवल 47 लोगों की आईडी का उपयोग
औसत क्लेम प्रति व्यक्ति ~6 बार मृत्यु दिखाई गई
वित्तीय प्रभाव ₹11.26 करोड़
"सिवनी में 47 लोग 280 बार मरे... 2024 में 1996 में मर चुके व्यक्ति को जीवित दिखाकर जमीन बेची गई।"
संपादकीय विश्लेषण: 'सिस्टम' के चार भयानक सच
1. 'मुर्दा' बोलता है (The Dead Man Loophole)

राजस्व रिकॉर्ड में जीवित और मृत का खेल चल रहा है। क्या हमारी सत्यापन प्रक्रिया (Verification Process) इतनी लचर है कि मरे हुए लोग जमीन बेच रहे हैं और मुआवजा ले रहे हैं?

2. रिश्वत का 'रेट कार्ड' (Institutionalized Bribery)

मुरैना में नामांतरण का 'फिक्स रेट' (₹18,000) है। मुख्य सचिव (CS) स्वयं स्वीकार करते हैं कि "बिना पैसे लिए काम नहीं होता"। जब शीर्ष नेतृत्व यह मान ले, तो सुधार की गुंजाइश कहाँ बचती है?

3. हितों का टकराव (Conflict of Interest)

रेरा चेयरमैन द्वारा उसी बिल्डर से प्लॉट स्वीकार करना जिसके केस वे सुन रहे हैं, 'रेगुलेटरी कैप्चर' का प्रमाण है। संस्थाएं जनता के लिए नहीं, रसूखदारों के लिए काम कर रही हैं।

4. निर्माण के नाम पर लूट

भोपाल नगर निगम मुख्यालय का काम अधूरा है, लेकिन 25 रनिंग बिलों के जरिए ₹32 करोड़ का भुगतान हो गया। यह जनता की गाढ़ी कमाई का खुला मजाक है।

जनता की अदालत

सवाल आपसे और व्यवस्था से

01

जब प्रदेश के मुख्य सचिव स्वयं स्वीकार कर रहे हैं कि "पैसों के बिना काम नहीं होता", तो एक आम नागरिक अपनी शिकायत लेकर कहाँ जाए?

02

17 जिलों में भूमि पुनर्वर्गीकरण के नाम पर ₹6,000 करोड़ का खेल हुआ। क्या इसकी उच्च स्तरीय जांच होगी, या यह भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

03

रेरा (RERA) में 5,500+ शिकायतें और समाधान 40% से कम। क्या रेरा बिल्डरों का ढाल बन गया है?

04

क्या 238 अवैध कॉलोनियों का रिकॉर्ड से गायब होना, प्रशासन की गहरी मिलीभगत का प्रमाण नहीं है?

फैसला: जनता के हाथ में