गुना में सरकारी लैब ने माना पठार मोहल्ला का पानी पीने लायक नहीं, जिला प्रशासन बेखबर गुना शहर के वार्ड क्रमांक 11 के पठार मोहल्ला में लोग पी रहे हैं धीमा जहर, जी हां, यह कहना इसलिए उचित है क्योंकि गुना की सरकारी लैब ने एक रिपोर्ट में माना है कि यहां का पानी पीने लायक नहीं है। 'हर घर नल से जल' का दावा करने वाली मध्यप्रदेश सरकार की पोल खुद उसकी ही गुना लैब ने खोल दी है। गुना के पठार मोहल्ला से 16 जून 2026 को लिए गए पानी के सैंपल की रिपोर्ट सामने आई है, जिसने जिला प्रशासन और नगरपालिका, जल प्रकोष्ठ विभाग (PHE) की लापरवाही को दिखाया गया दिया। सरकारी रिपोर्ट में जहर ही जहर... District Water Testing Laboratory Guna की WQMIS रजिस्टर की एंट्री नंबर 1 में जो की गुना के वार्ड क्रमांक 11 पठार मोहल्ला में 16/06/2026 को लक्ष्मण भड़ेरिया के घर से लिए गए सैंपल को पीएचई स्टाफ के रामकृष्ण ओझा द्वारा जमा किए गए सैंपल के नतीजे चौंकाने वाले हैं: पैरामीटर मिला BIS मानक **Total Hardness** **850 mg/L** 600 mg/L अधिकतम **Fluoride** **1.5 mg/L** 1.0 mg/L अधिकतम **Turbidity** **4 NTU** 1 NTU अधिकतम **Free Chlorine** **0.0 mg/L** 0.2 mg/L न्यूनतम यानी पानी में खारापन तय सीमा से 42% ज्यादा, फ्लोराइड 50% ज्यादा, गंदापन 4 गुना ज्यादा और उसे शुद्ध करने वाली क्लोरीन पूरी तरह गायब। PHE पर सीधे सवाल,जहर क्यों बांट रहे.. 850 Hardness वाला पानी किडनी स्टोन का घर है। 1.5 Fluoride बच्चों के दांत-हड्डी गलाने के लिए काफी है। ये पानी PHE की टंकी से पाइपलाइन के द्वारा आ रहा है। रिपोर्ट में Free Residual Chlorine जीरो है। मतलब टंकी में क्लोरीन डोजर बंद पड़ा है। आज http://E.Coli जीरो है, कल बारिश में नाली का पानी मिला तो पूरा मोहल्ला हैजे की चपेट में आएगा। जल जीवन मिशन के करोड़ों रुपए कहां खर्च हुए जब आज भी जनता को RO खरीदकर जान बचानी पड़ रही है? जिला प्रशासन की चुप्पी खतरनाक... यह रिपोर्ट 16 जून की है। आज 19 जून तक कलेक्टर, SDM या CMHO ने पठार मोहल्ला में न तो पानी की वैकल्पिक व्यवस्था की, न ही जनता को चेतावनी जारी की। क्या प्रशासन को किसी बड़ी बीमारी या जनहानि का इंतजार है? जल प्रकोष्ठ विभाग की नाकामी... पठार मोहल्ले के लोग बोले - हम क्या जानवर हैं? स्थानीय निवासी लक्ष्मण भड़ेरिया ने कहा, "सैंपल मेरे घर से ही दिया गया था। रिपोर्ट आ गई पर कोई बताने तक नहीं आया कि पानी खराब है। हम तो यही पानी पी रहे हैं। हम बीमार पड़ रहे हैं। 'नल-जल योजना' के नाम पर जनता को धीमा जहर पिलाया जा रहा है। जब सरकार की अपनी लैब ही पानी को 'अनफिट' घोषित कर दे, तो जिला प्रशासन और मध्य प्रदेश सरकार किस मुंह से विकास के दावे करेगा? ( नोट यह पूरी रिपोर्ट का विश्लेषण AI के द्वारा किया गया है जो सरकारी रिपोर्ट थी उसके अनुसार)

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