मध्य प्रदेश में सरकारी कामकाज में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन को सुनिश्चित करने की दिशा में राज्य सरकार पूरी तरह सख्त नजर आ रही है। इसी कड़ी में मध्यप्रदेश वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स कॉरपोरेशन के अंतर्गत एक बड़ी और सख्त प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है। निगम के अध्यक्ष श्री संजय नगायच द्वारा पूर्व में पन्ना शाखा के अंतर्गत आने वाले लक्ष्मीपुर ओपन कैप का औचक निरीक्षण किया गया था। इस निरीक्षण के दौरान भंडारण व्यवस्था, कार्यों के संचालन और प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं और भारी लापरवाही पाई गई थी, जिसे अध्यक्ष ने बेहद गंभीरता से लिया था और मौके पर ही तत्काल विस्तृत जांच के आदेश दिए थे। अब इस मामले की जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद गंभीर लापरवाहियां प्रमाणित हुई हैं, जिसके परिणामस्वरूप पन्ना शाखा प्रबंधक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

निरीक्षण के दौरान सामने आई थीं कार्य में गंभीर त्रुटियां

अध्यक्ष श्री संजय नगायच द्वारा पूर्व में जब पन्ना जिले के लक्ष्मीपुर ओपन कैप का मैदानी निरीक्षण किया गया था, तो वहां व्यवस्थाओं में कई प्रकार की खामियां और मनमानी देखने को मिली थी। किसानों के अनाज के रखरखाव, भंडारण और प्रशासनिक कामकाज में बरती गई यह लापरवाही सीधे तौर पर पन्ना शाखा के प्रबंधकीय दायित्वों पर बड़ा सवालिया निशान खड़े कर रही थी।

निरीक्षण के तुरंत बाद अध्यक्ष के निर्देश पर विभागीय स्तर पर एक उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच बिठाई गई थी। हाल ही में जब इस प्रकरण की पूरी जांच प्रक्रिया पूर्ण हुई, तो जांच रिपोर्ट में यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया कि संबंधित शाखा प्रबंधक द्वारा अपने पदीय दायित्वों के निर्वहन में अत्यंत गंभीर त्रुटियां और घोर लापरवाही बरती गई है। मामले की गंभीरता और पदीय कर्तव्यों के हनन को देखते हुए अध्यक्ष श्री नगायच के स्पष्ट निर्देशों के तहत यह दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई गई है।

भ्रष्टाचार और लापरवाही के प्रति अपनाई गई है 'जीरो टॉलरेंस' नीति

शाखा प्रबंधक के निलंबन की इस कार्रवाई के बाद मध्यप्रदेश वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स कॉरपोरेशन के अध्यक्ष श्री संजय नगायच ने कड़ा संदेश देते हुए स्पष्ट किया है कि निगम के अंतर्गत किसी भी प्रकार की अनियमितता, वित्तीय या प्रशासनिक भ्रष्टाचार और अपने काम के प्रति लापरवाही के लिए 'शून्य सहनशीलता' (Zero Tolerance) की नीति पूरी सख्ती से अपनाई जा रही है।

अध्यक्ष ने दो टूक शब्दों में कहा कि अन्नदाता किसानों के हितों, भंडारण व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही से किसी भी स्तर पर कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। किसानों की मेहनत और सरकारी संसाधनों के प्रबंधन में कोताही बरतने वाले तत्वों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि भविष्य में यदि राज्य के किसी भी जिले में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा इस तरह की लापरवाही या वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितता पाई जाती है, तो उनके विरुद्ध भी बिना किसी विलंब के नियमानुसार कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

सुशासन और जवाबदेही है सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता

इस संपूर्ण प्रकरण पर बात करते हुए अध्यक्ष श्री नगायच ने प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विजन को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप पूरे शासन और प्रशासन तंत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन स्थापित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

प्रदेश सरकार की नीति इस मामले में बेहद स्पष्ट है कि शासकीय कार्यों में लापरवाही, भ्रष्टाचार और व्यवस्थाओं के साथ खिलवाड़ करने वालों के लिए प्रशासनिक व्यवस्था में कोई स्थान नहीं है। ऐसे प्रत्येक मामले में दोषियों के विरुद्ध बिना किसी दबाव के कठोर कार्रवाई करने का सिलसिला लगातार जारी रहेगा, ताकि महकमे में पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ काम करने का माहौल बना रहे।

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