अघोषित बिजली कटौती पर मंडला जिला में कांग्रेस का हल्लाबोल
बिजली व्यवस्था की शव यात्रा” निकाल विद्युत विभाग का घेराव, सुधार नहीं हुआ तो उग्र आंदोलन की चेतावनी
मंडला | संवाददाता : प्रशांत पटैल
भीषण गर्मी के बीच मंडला जिले में लगातार हो रही अघोषित बिजली कटौती को लेकर अब राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। बुधवार को नगर कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने बिजली व्यवस्था के खिलाफ अनोखा प्रदर्शन करते हुए “बिजली व्यवस्था की शव यात्रा” निकाली और विद्युत विभाग कार्यालय पहुंचकर जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग हाथों में तख्तियां, सिर पर काली पट्टियां और कंधों पर प्रतीकात्मक शव लेकर पहुंचे। “बिजली दो… जनता को राहत दो…” जैसे नारों से पूरा परिसर गूंज उठा। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मंडला नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में घंटों अघोषित बिजली कटौती की जा रही है, जिससे आमजन का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
ग्रामीणों ने बताया कि भीषण गर्मी में लोग रातभर जागने को मजबूर हैं। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, पेयजल संकट गहरा गया है और मोबाइल चार्ज करना तक मुश्किल हो गया है। लोगों का कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद विभाग केवल आश्वासन दे रहा है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष अशोक मर्सकोले ने सरकार और विद्युत विभाग पर जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनहीन होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में बिजली संकट से किसानों की सिंचाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है, वहीं छोटे व्यापारियों का कारोबार भी ठप पड़ने की स्थिति में पहुंच गया है। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि जल्द व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा।
वहीं विद्युत विभाग ने बढ़ते बिजली लोड को कटौती की मुख्य वजह बताया है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार भीषण गर्मी के चलते एसी, कूलर और पंखों का उपयोग अचानक बढ़ जाने से ओवरलोडिंग और ट्रिपिंग की समस्या सामने आ रही है। अधिकारियों का कहना है कि पिछले सप्ताह कुछ तकनीकी दिक्कतें जरूर आई थीं, लेकिन अब स्थिति सामान्य है और टीम लगातार बिजली आपूर्ति की मॉनिटरिंग कर रही है।
फिलहाल मंडला में बिजली संकट को लेकर जनता का आक्रोश अब राजनीतिक आंदोलन का रूप ले चुका है। भीषण गर्मी के बीच बिजली कटौती से परेशान लोग राहत की मांग कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस इसे सरकार की बड़ी नाकामी बताते हुए आंदोलन तेज करने की तैयारी में जुट गई है। अब नजर इस बात पर है कि विद्युत विभाग के दावे जमीनी स्तर पर कितने कारगर साबित होते हैं।

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