ओंकारेश्वर
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में एक बेटी अपने साहस और मेहनत से नई पहचान बना रही है। यहां की निवासी लगभग उन्नीस वर्षीय मुस्कान केवट मां नर्मदा की लहरों के बीच नाव की पतवार संभालते हुए श्रद्धालुओं को एक घाट से दूसरे घाट तक सुरक्षित पहुंचा रही हैं। परंपरागत रूप से पुरुषों द्वारा किए जाने वाले इस कार्य में कदम रखकर मुस्कान ने महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है।

परिवार की आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए एवं घर में बड़ी लड़की होने की वजह से मुस्कान ने अपने पिता के काम में हाथ बंटाने का निर्णय लिया। शुरुआत में घाट पर आने वाले कई लोगों को यह देखकर आश्चर्य हुआ और कुछ ने सवाल भी उठाए, लेकिन मुस्कान ने आत्मविश्वास और साहस के साथ अपने कार्य को जारी रखा। धीरे-धीरे श्रद्धालुओं ने उनके प्रयासों को सराहा और आज वह पूरे विश्वास के साथ नाव संचालन कर रही हैं।

करीब तीन वर्षों से मुस्कान अपने पिता के साथ नाव में सवारी बिठाना एवं समय समय पर नाव चलाने का कार्य कर रही हैं। वह श्रद्धालुओं को नाव में बैठाकर मां नर्मदा के पवित्र तटों की सैर कराती हैं और उन्हें सुरक्षित घाट तक पहुंचाती हैं।

 घाट पर आने वाले लोग भी उनकी लगन, साहस और मेहनत की सराहना करते हैं।
मुंबई के डोंबीवली से दर्शन के लिए आई श्रद्धालु श्वेता देशमुख ने कहा कि मुस्कान का साहस वास्तव में प्रेरणादायक है। उन्होंने बताया कि आमतौर पर नाव चलाते हुए पुरुषों को देखा जाता है, लेकिन एक युवती को इतनी आत्मविश्वास के साथ नाव संचालन करते देख उन्हें बेहद खुशी हुई। उनके अनुसार मुस्कान का यह प्रयास समाज में महिलाओं के आत्मविश्वास और सशक्तिकरण का प्रतीक है।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर मुस्कान केवट की यह कहानी यह संदेश देती है कि दृढ़ निश्चय और मेहनत के बल पर बेटियां किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़कर अपनी अलग पहचान बना सकती हैं। मां नर्मदा की लहरों के बीच नाव की पतवार संभालती मुस्कान आज कई युवतियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।