पांगरी बांध परियोजना: किसानों के अनूठे आंदोलन से प्रशासन पर दबाव

खकनार: पिछले तीन वर्षों से पांगरी बांध परियोजना के प्रभावित किसान अपने अनूठे और विचित्र आंदोलनों के माध्यम से प्रदेश भर में चर्चा का विषय बने हुए हैं। हाल ही में, नेपानगर में किसानों के शिष्टमंडल और अनुविभागीय अधिकारी के बीच भूमि अधिग्रहण कानून के विभिन्न धाराओं एवं अधिनियमों पर गहन एवं विस्तृत चर्चा संपन्न हुई।

अनुविभागीय अधिकारी श्री भगीरथ वाखला ने किसानों को आश्वस्त किया कि उन्हें कानूनन अधिकतम मुआवजा प्रदान किया जाएगा। इस पर, किसान नेता डॉ. रवि कुमार पटेल ने स्पष्ट किया कि अगर सरकार न्याय संगत मुआवजा नहीं देती है, तो आंदोलन और भी तीव्र और व्यापक स्वरूप में किया जाएगा।

  • किसानों की प्रमुख मांग: ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण के लिए दो गुना मुआवजा का प्रावधान है, जिसे वे सुनिश्चित करना चाहते हैं।
  • आंदोलन के प्रकार: किसानों ने शीर्षासन आंदोलन, पत्थर खाओ आंदोलन, धृतराष्ट्र आंदोलन, सिर पर खेती आंदोलन, मुंह काला आंदोलन, सद्बुद्धि यज्ञ आंदोलन, अर्धनग्न आंदोलन जैसे अनेक आंदोलन किए हैं।

इस महत्वपूर्ण बैठक में शिष्टमंडल की अगुवाई डॉ. रवि कुमार पटेल ने की, जिसमें नंदू पटेल, मान्या भिलावेकर, माधो नाटो, बद्री वास्कले, राहुल राठोड़, रामदास, श्रीराम मामराज, सालिकराम, संजय चौकसे, श्रीकिशन सहित अन्य किसान उपस्थित थे।

आगे की राह: यह देखना दिलचस्प होगा कि किसानों और प्रशासन के बीच यह समझौता कब तक कायम रहता है। गलियारों में यह भी चर्चा है कि आने वाले दिनों में पांगरी बांध प्रभावित किसान और अधिक आक्रामक आंदोलन कर सकते हैं।