दुनिया भर में 'टाउन एंड कंट्री प्लानिंग' का मतलब होता है भविष्य के शहरों की शानदार रूपरेखा तैयार करना। लेकिन मध्य प्रदेश में यह विभाग मानो एक ऐसा 'जादुई चश्मा' बन गया है, जिसे पहनकर अधिकारियों को 7,981 अवैध कॉलोनियां दिखाई ही नहीं देतीं!

जब तक प्रशासन की नींद टूटती है, तब तक भू-माफिया कृषि भूमि पर कंक्रीट का जंगल खड़ा कर चुके होते हैं। आइए, आज मध्य प्रदेश के 'टाउन एंड कंट्री प्लानिंग' (TNCP) विभाग के कामकाज, उसके नियमों और जमीनी हकीकत का पूरा 'लेआउट' समझते हैं।

सिर्फ भोपाल में अक्टूबर से दिसंबर 2025 के 3 महीनों के भीतर 63 नई अवैध साइट्स शुरू हो गईं।
अवैध कॉलोनियों का बढ़ता ग्राफ
स्रोत: विभागीय आंकड़े (2016-वर्तमान)

टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNCP) मध्य प्रदेश सरकार का नोडल विभाग है। इसका कार्य शहर का फैलाव, आवासीय व व्यावसायिक क्षेत्र, और ग्रीन बेल्ट तय करना है। इसका उद्देश्य नागरिकों को सड़क, पानी और पार्क जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ सुरक्षित माहौल देना है।

MP Town and Country Planning Act, 1973:

यह कानून राज्य सरकार को 'प्लानिंग एरिया' घोषित करने की शक्ति देता है। बिना अनुमति के 'Land Use Change' या निर्माण करना पूरी तरह गैरकानूनी है।

मास्टर प्लान
शहर का 10-20 साल का विजन डॉक्यूमेंट और भविष्य के लिए भूमि आरक्षण।
ज़ोनिंग (Zoning)
शहर को रिहायशी, कमर्शियल और इंडस्ट्रियल जोन में बांटना।
लेआउट अप्रूवल
सड़क और ओपन स्पेस (पार्क) सुनिश्चित करते हुए नक्शे पास करना।
डायवर्शन
कृषि भूमि का विधिवत गैर-कृषि उपयोग में परिवर्तन सुनिश्चित करना।
1. संचालक (Director):
राज्य स्तर पर मुखिया (भोपाल मुख्यालय)।
2. संयुक्त संचालक (Joint Director):
संभाग स्तर पर सबसे अहम। लेआउट अप्रूवल का अधिकार।
3. क्षेत्रीय कार्यालय:
विकास प्राधिकरणों (IDA, BDA) के साथ मिलकर काम करने वाले।
Step 1: दस्तावेजों की जांच
जमीन के मालिकाना हक और खसरा रिकॉर्ड का सत्यापन।
Step 2: डायवर्शन
राजस्व विभाग से कृषि भूमि का डायवर्शन कराना।
Step 3: लेआउट जमा करना
TNCP में नक्शा जमा, जिसमें प्लॉट, सड़क, पार्क स्पष्ट हों।
Step 4: RERA & नगर निगम
TNCP पास होने के बाद रेरा रजिस्ट्रेशन और विकास की अनुमति।

कागजों पर मास्टर प्लान वर्ल्ड-क्लास होता है, लेकिन जमीन पर TNCP का रवैया 'री-एक्टिव' है। शहर बेतरतीब फैलने के बाद सर्वे होता है।

जबलपुर लेआउट स्कैम
अगस्त 2025: 8 कॉलोनाइजर्स पर FIR। बिना जॉइंट डायरेक्टर की अनुमति के पूरी कॉलोनियां बसा दी गईं।
रिकॉर्ड से गायब
भोपाल और आसपास की 238 अवैध कॉलोनियों के नाम रिकॉर्ड से हटा दिए गए।
7,981
अवैध कॉलोनियां
(मध्य प्रदेश में वर्तमान स्थिति)
लीगल टाइटल: 100% गारंटी।
सुविधाएं: सड़क, बिजली, पानी, सीवेज अनिवार्य।
वित्तीय सुरक्षा: आसानी से होम लोन उपलब्ध।
सुरक्षा: बुलडोज़र का डर नहीं।

⚠️ FIR और जेल: नए कानून में 10 साल की जेल और 1 करोड़ तक जुर्माना।

⚠️ Demolition: अवैध निर्माण ढहाने का प्रावधान (जैसे भोपाल के खेजड़ा में कार्रवाई)।

⚠️ कम्पाउंडिंग: केवल छोटे उल्लंघनों के लिए, पूरी कॉलोनी के लिए नहीं।

"पूरे मध्य प्रदेश में 7,981 अवैध कॉलोनियां रातों-रात तो नहीं बस गईं। जब खेतों में जेसीबी चल रही होती है, तब जोनल अधिकारियों को यह क्यों नहीं दिखता?"

"238 अवैध कॉलोनियों के नाम रिकॉर्ड से हटा देना समस्या का समाधान है या भू-माफियाओं को बचाने की सरकारी साजिश?"

स्टेट न्यूज़ ए आई व्यू : TNCP आज सिर्फ रसूखदारों के नक्शे पास करने और गरीबों के आशियाने पर बुलडोज़र चलाने का मूक दर्शक है। जब तक 'सेटिंग' बंद नहीं होगी, शहर कंक्रीट के अवैध जंगलों में बदलते रहेंगे।