पंप के पीछे अंधेरे में खाली हो रहा था ट्राला, किसान पहुंचे तो मचा हड़कंप; कृषि विभाग 3 घंटे थाने में बैठा रहा, FIR बिना लौटे अफसर
 विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल, डीडीओ फोन तक नहीं उठा रहे; संदिग्ध खाद मामले में प्रशासन की भूमिका कटघरे में

बड़वानी। बुधवार रात जिला मुख्यालय से लगे ग्राम करी-बड़वानी मार्ग पर नायरा पेट्रोल पंप के पीछे जो कुछ हुआ, उसने कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रात करीब 10 बजे अंधेरे में एक ट्राला क्रमांक एमपी 09 एच एच 8361 से कथित तौर पर संदिग्ध खाद दूसरी ट्रॉली में उतारी जा रही थी। किसानों को भनक लगी तो वे मौके पर पहुंच गए। किसानों ने जब पूछताछ की तो वहां मौजूद लोग खाद को “वन्तरा फर्टिलाइजर” नामक बायो फर्टिलाइजर बताते रहे, लेकिन यह खाद कहां से आई, किसके आदेश पर लाई गई और कहां भेजी जा रही थी—इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला।

मामला बढ़ता देख प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और ट्राले को जांच के लिए थाने भिजवाया गया। किसानों को उम्मीद थी कि अब बड़ी कार्रवाई होगी, लेकिन गुरुवार को जो हुआ उसने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया। वहीं गुरुवार शाम करीब 5 बजे कृषि विभाग के अधिकारी और कर्मचारी कथित तौर पर कार्रवाई के लिए शहर कोतवाली पहुंचे। सूत्रों के अनुसार विभागीय अमला आवेदन और दस्तावेज लेकर एफआईआर दर्ज कराने पहुंचा था। लेकिन शाम 5 बजे से रात 8 बजे तक पुलिस और विभागीय अधिकारियों के बीच लंबी चर्चा चलती रही। इसके बाद बिना FIR दर्ज कराए पूरा अमला चुपचाप रवाना हो गया। किसानों का आरोप है कि आम किसान को खाद लेने के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ता है, पंजीयन और ई-टोकन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जबकि दूसरी ओर रात के समय खुलेआम खाद की ढुलाई और ट्रांसफर हो रहा है। रात में मौके पर पहुंचे किसान पिंटू भायल सहित अन्य किसानों ने आरोप लगाया कि पूरी गतिविधि बेहद संदिग्ध थी। किसानों के अनुसार काम तेजी और गोपनीय तरीके से किया जा रहा था।
उधर पूरे मामले में जिला कृषि विभाग के डीडीओ के.एस. वास्केल की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। मीडिया द्वारा संपर्क करने पर उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। वहीं थाने पहुंचे विभागीय कर्मचारियों से जब जानकारी मांगी गई तो वे लगातार “डीडीओ से बात कीजिए” कहकर जिम्मेदारी टालते नजर आए। यहां तक कि अमले से यह पूछने पर कि डीडीओ कहां हैं, वे भी गोलमोल जवाब देते रहे।