ग्रामीण क्षेत्रों में हैंड पंपों के अस्तित्व खतरे में
बढ़ती पेयजल समस्या का कैसे होगा निदान
*मझौली/सीधी
एक तरफ जहां ग्रामीण क्षेत्रों में शासकीय हैंड पंप पेयजल के मुख्य साधन माने जाते हैं जिसकी जिम्मेदारी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की है।लेकिन विभाग के अनदेखी या रखरखाव में उदासीनता के चलते हैंडपंपों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ता नजर आ रहा है ऐसे में सवाल उठता है कि गर्मी के सीजन में बढ़ती पेय जल समस्या का निदान कैसे होगा।
ग्रामीणों के मुताबिक ग्राम पंचायत पांड़ में धनौली पहुंच मुख्य मार्ग सड़क के बगल में संचालित हैंड पंप को कचरे और कूड़े से पाट दिया गया है इसी तरह ग्राम पंचायत पोंड़ी के अहिरान टोला में जमीन समतलीकरण में हैंड पंप को पाट दिया गया है। ग्रामीणों ने कहा कि मुताबिक किया यह तो मात्र बानगी है कई ग्राम पंचायतों में इसी तरह हैंडपंपों के अस्तित्व को नष्ट किया जा रहा है। जिस ओर विभाग के द्वारा संज्ञान लेकर सुरक्षित और उपयोगी किया जाना चाहिए अन्यथा विभाग अनुपयोगी हैंड पंपों को उखाड़ कर उनके बेस कीमती सामानों को कार्यालय में संरक्षित करे ताकि भविष्य में वह सामग्री काम आ सके।
*इनका कहना*
बहुत दिनों तक हम लोग इसी हैंड पंप से पानी पीते थे लेकिन तकनीकी खराबी के चलते पानी नहीं निकल रहा है हमारी मांग है कि मरम्मत करा कर चालू किया जाए।
*महादेव यादव ग्रामीण*
बात संज्ञान में दी गई है तो दोनों हैंड पंपों की जांच कराई जाएगी अगर मरम्मत से उपयोगी लायक होंगे तो मरम्मत की जाएगी अन्यथा उखाड़ कर उनके सामग्री कार्यालय में सुरक्षित की जाएगी जहां भी जानकारी मिलती है तो तहकीकात की जाती है यह सही बात है कि कर्मचारियों की कमी से थोड़ा देरी जरूर होती है।
*अशोक पांडेय टेक्नीशियन पी एच ई कार्यालय मझौली*

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