सागर संभाग में मौसम का मिजाज बिगड़ने की चेतावनी: कमिश्नर अनिल सुचारी ने जारी किया हाई-अलर्ट, अन्नदाताओं से फसलों को सुरक्षित रखने की भावुक अपील
पश्चिमी विक्षोभ के चलते बारिश और ओलावृष्टि की आशंका, गेहूं, चना और मसूर की उपज को भीगने से बचाने के लिए प्रशासन ने कसी कमर।
मध्य प्रदेश: सागर। बुंदेलखंड के हृदय स्थल सागर संभाग में मौसम के बदलते मिजाज ने किसानों और प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा आगामी दिनों में गरज-चमक के साथ बारिश और संभावित ओलावृष्टि की चेतावनी जारी किए जाने के बाद, सागर संभाग के कमिश्नर श्री अनिल सुचारी ने सक्रियता दिखाते हुए संभाग के समस्त किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। कमिश्नर ने किसानों से अपील की है कि वे अपनी कड़ी मेहनत से उपजाई गई फसल, विशेषकर गेहूं, चना और मसूर को सुरक्षित स्थानों पर रखने का प्रबंध तत्काल करें।
मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर भारत में सक्रिय हो रहे एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ का सीधा असर मध्य प्रदेश के मध्य और उत्तरी भागों पर पड़ने की संभावना है। इसके प्रभाव से सागर, दमोह, पन्ना, छतरपुर और टीकमगढ़ जिलों में आसमान में बादल छाए रहने और छिटपुट से लेकर मध्यम दर्जे की वर्षा होने की प्रबल आशंका है। वर्तमान समय में रबी की फसलें या तो कटाई के स्तर पर हैं या खलिहानों में भंडारण के लिए रखी गई हैं। ऐसे में यदि बारिश होती है, तो फसलों की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और किसानों को भारी आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ सकता है।
कमिश्नर श्री अनिल सुचारी ने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि किसान भाई अपनी कटी हुई फसल को खुले में न छोड़ें। उन्होंने सुझाव दिया है कि फसलों को तिरपाल (Tarpaulins) से ढकने का समुचित प्रबंध किया जाए ताकि अचानक होने वाली वर्षा से अनाज को गीला होने से बचाया जा सके। प्रशासन ने यह भी निर्देश दिए हैं कि मंडियों में बिकने के लिए आई फसल को भी सुरक्षित गोदामों या शेड के नीचे रखा जाए। सागर संभाग का कृषि क्षेत्र मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। यहां का गेहूं अपनी उच्च गुणवत्ता के लिए देश भर में विख्यात है, ऐसे में नमी लगने से अनाज की चमक फीकी पड़ सकती है और बाजार में इसकी उचित कीमत मिलने में बाधा आ सकती है।
इस संकट की स्थिति में केवल किसान ही नहीं, बल्कि राजस्व और कृषि विभाग के मैदानी अमले को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। कमिश्नर ने जिला कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि वे पटवारियों और ग्राम सचिवों के माध्यम से गांवों में मुनादी करवाएं और किसानों को मौसम की पल-पल की जानकारी उपलब्ध कराएं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस समय चना और मसूर जैसी दलहनी फसलों में पानी भर जाता है, तो उनमें कवक (Fungus) लगने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, गेहूं की थ्रेशिंग के बाद जो भूसा बचता है, उसे भी सुरक्षित रखना पशुपालन के दृष्टिकोण से अनिवार्य है।
प्रशासनिक स्तर पर की गई इस पहल का किसान संगठनों ने स्वागत किया है, हालांकि उन्होंने सरकार से यह भी मांग की है कि यदि प्राकृतिक आपदा से किसी किसान का नुकसान होता है, तो आरबीसी 6-4 के तहत मुआवजे की प्रक्रिया में भी तेजी लाई जानी चाहिए। कमिश्नर सुचारी ने किसानों को धैर्य रखने और वैज्ञानिक तरीकों से अपनी उपज का संरक्षण करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि प्रशासन किसानों के साथ खड़ा है और हर संभव सहायता के लिए तैयार है। यह चेतावनी उन किसानों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जिन्होंने अपनी फसल को खलिहानों में इकट्ठा किया है और थ्रेशिंग का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले 48 से 72 घंटे सागर संभाग की कृषि के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण रहने वाले हैं।
Image Credit: gad.mp.gov.in
Continue With Google
Comments (0)