बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। गौर पुनर्स्थापना कार्यक्रम के तहत सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से 5 गौर - एक नर और चार मादा - को बांधवगढ़ में सफलतापूर्वक स्थानांतरित किया गया है। इन गौरों को कल्लवाह परिक्षेत्र में बने 20 हेक्टेयर के विशेष बाड़े में छोड़ा गया है, जहां विशेषज्ञ उनकी एक महीने तक निगरानी करेंगे।

दशकों बाद गौरों की बांधवगढ़ में वापसी

यह प्रयास बांधवगढ़ के जंगलों में दशकों पहले विलुप्त हो चुकी गौर की आबादी को पुनर्स्थापित करने के लिए किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत कुल 50 गौरों को चरणबद्ध तरीके से बांधवगढ़ लाने की योजना है। पहले चरण में 22 गौरों को यहां सफलतापूर्वक बसाया जा चुका है। हाल ही में आए पांच नए गौरों के बाद इनकी कुल संख्या 27 हो गई है।

विशेष बाड़े में एक महीने की निगरानी

  • गौरों की स्वास्थ्य और व्यवहार पर कड़ी नजर
  • नए माहौल के साथ अनुकूलन की प्रक्रिया की जांच
  • स्वास्थ्य जांच पूरी होने के बाद जंगल में छोड़ा जाएगा

पारिस्थितिक संतुलन के लिए महत्वपूर्ण

यह पूरा कार्यक्रम भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) और मध्य प्रदेश वन विभाग के संयुक्त प्रयासों से चलाया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि गौर जैसे बड़े शाकाहारी जानवरों की वापसी से जंगल के पारिस्थितिक संतुलन को मजबूती मिलेगी। इससे न केवल घास के मैदानों का प्रबंधन बेहतर होगा, बल्कि बाघ जैसे मांसाहारी जीवों के लिए शिकार का एक प्राकृतिक आधार भी मजबूत होगा।

आने वाले समय में और गौरों को स्थानांतरित कर इस कार्यक्रम को और आगे बढ़ाया जाएगा, जिससे बांधवगढ़ के पारिस्थितिकी तंत्र को नया जीवन मिल सके।