अभिभावकों में आक्रोश, कार्रवाई की मांग: जैतपुर महाविद्यालय में अतिथि विद्वान पर अवैध वसूली और छात्राओं के उत्पीड़न के आरोप

शहडोल। जिले के शासकीय महाविद्यालय जैतपुर में पदस्थ एक अतिथि विद्वान पर छात्राओं से अवैध वसूली, दुर्व्यवहार एवं शैक्षणिक कार्यों के नाम पर आर्थिक लाभ लेने के गंभीर आरोप सामने आने के बाद अभिभावकों और विद्यार्थियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। मामले को लेकर अभिभावकों ने उच्च शिक्षा विभाग एवं जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है। वहीं महाविद्यालय प्रबंधन की चुप्पी भी कई सवाल खड़े कर रही है।

रिजल्ट सुधारने और जारी कराने के नाम पर वसूली का आरोप

जानकारी के अनुसार शासकीय महाविद्यालय जैतपुर में गणित विषय के अतिथि विद्वान के रूप में पदस्थ जितेंद्र कुशवाहा पर आरोप है कि वे विद्यार्थियों के रिजल्ट सुधारने, पोर्टल संबंधी त्रुटियों को ठीक कराने तथा अन्य प्रशासनिक कार्यों के नाम पर छात्रों एवं छात्राओं से पैसे की मांग करते हैं। कई छात्राओं ने आरोप लगाया है कि रिजल्ट जारी कराने और अंकसूची संबंधी समस्याओं के निराकरण के लिए उन्हें लंबे समय तक परेशान किया गया।

सूत्रों का दावा है कि एक छात्रा पिछले लगभग दो वर्षों से अपने रिजल्ट की समस्या के समाधान के लिए महाविद्यालय के चक्कर काट रही है। आरोप है कि कभी पोर्टल में तकनीकी खामी तो कभी सीसी नंबर में त्रुटि बताकर उसे लगातार टालने का प्रयास किया गया तथा आर्थिक मांग भी की गई।

क्या बोले आरोपों से घिरे अतिथि विद्वान?

मामले को लेकर जब स्टेट न्यूज़ ने अतिथि विद्वान जितेंद्र कुशवाहा से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया, तो उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्होंने किसी भी छात्र या छात्रा से किसी प्रकार की राशि नहीं ली है और न ही किसी से पैसे की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी को कोई शिकायत है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए, जिससे सच्चाई सामने आ सके।

छात्राओं ने लगाए मानसिक प्रताड़ना के आरोप

मामले में कुछ छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया है कि संबंधित अतिथि विद्वान का व्यवहार विद्यार्थियों के प्रति उचित नहीं है। छात्राओं का कहना है कि उन्हें कई बार अपमानजनक भाषा और अनावश्यक दबाव का सामना करना पड़ा। भाटिया निवासी एक छात्रा ने भी लंबे समय से प्रताड़ित किए जाने की बात कही है।

हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन लगातार सामने आ रही शिकायतों ने महाविद्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

विवादों से पुराना नाता?

सूत्रों के अनुसार संबंधित अतिथि विद्वान की कार्यशैली पूर्व में भी विवादों के घेरे में रही है। बताया जाता है कि पूर्व प्राचार्य के कार्यकाल में उनके पास मौजूद कई प्रशासनिक प्रभार वापस ले लिए गए थे। हालांकि वर्तमान प्राचार्य के कार्यकाल में उन्हें पुनः महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपे जाने के बाद विवाद एक बार फिर चर्चा का विषय बन गए हैं।

महाविद्यालय प्रबंधन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

मामले को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि विद्यार्थियों और अभिभावकों द्वारा लगातार शिकायतें की जा रही हैं तो महाविद्यालय प्रबंधन अब तक मौन क्यों है। अभिभावकों का कहना है कि यदि समय रहते शिकायतों पर ध्यान दिया जाता तो विद्यार्थियों को इस प्रकार की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता।

उच्च स्तरीय जांच की मांग

स्थानीय नागरिकों, अभिभावकों एवं छात्र संगठनों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि शिक्षा संस्थानों की गरिमा बनी रहे और विद्यार्थियों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

प्रशासन से अपेक्षा

शिक्षा के मंदिर माने जाने वाले महाविद्यालयों में यदि विद्यार्थियों को अपने शैक्षणिक कार्यों के लिए भटकना पड़े और उन पर आर्थिक दबाव बनाए जाने के आरोप लगें, तो यह व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन और उच्च शिक्षा विभाग पर टिकी हैं कि वे इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।

(नोट: समाचार में उल्लेखित आरोप विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं स्थानीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी पर आधारित हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। 

रिपोर्टर: दीपेंद्र सिंह बघेल
स्टेट न्यूज़, शहडोल