सीहोर के भैरुंदा में बेलगाम रेत माफिया: ग्रामीणों ने रोकी अवैध रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली

रिपोर्ट: बसीम उददीन

सीहोर जिले के भैरुंदा क्षेत्र में रेत माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि उन्हें प्रशासनिक कार्रवाई का जरा भी भय नहीं है। अवैध रूप से रेत का परिवहन लगातार जारी है, जिससे शासन को राजस्व की हानि हो रही है। प्रशासन की कार्रवाई से बचने के लिए रेत माफिया मुख्य मार्गों की बजाय ग्रामीण रास्तों का उपयोग कर रहे हैं।

भैरुंदा तहसील के ग्राम रफीगंज-लोदड़ी के ग्रामीणों ने अवैध रूप से रेत का परिवहन कर रहे ट्रैक्टर-ट्रॉली को रोक दिया। ग्रामीणों का कहना है कि ये वाहन तेज रफ्तार से गांव के भीतर से गुजरते हैं, जिससे हमेशा दुर्घटना का खतरा बना रहता है।

आरोप है कि रेत से भरे अधिकांश ट्रैक्टर-ट्रॉली बिना रॉयल्टी, बिना नंबर प्लेट और बिना वैध दस्तावेजों के संचालित हो रहे हैं। कई चालकों के पास ड्राइविंग लाइसेंस तक नहीं है।

ग्रामीणों की चिंता: हादसे का खतरा

ग्राम लोदड़ी निवासी बबलू यादव ने बताया कि गांव के लोग कई बार ट्रैक्टर चालकों को गांव के रास्ते से न निकलने की समझाइश दे चुके हैं। चौकीदार द्वारा भी उन्हें रोका गया, लेकिन इसके बावजूद चालक तेज रफ्तार से गांव के भीतर से वाहन निकाल रहे हैं।

हाल ही में ग्राम लोदड़ी में एक बड़ा हादसा टल गया, जब तेज रफ्तार रेत से भरा एक ट्रैक्टर-ट्रॉली अनियंत्रित होकर एक दुकान में जा घुसा। घटना के समय दुकान में एक बच्ची मौजूद थी, लेकिन सौभाग्य से कोई जनहानि नहीं हुई। घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने ट्रैक्टर-ट्रॉली को रोककर पुलिस को सूचना दी।

ट्रैक्टर चालक की जुबानी: "रॉयल्टी नहीं है"

ट्रैक्टर चालक वीर सिंह ने बताया कि रेत की रॉयल्टी नहीं है और कहा कि गांव का रास्ता सीधा पड़ता है, इसलिए इसी मार्ग का उपयोग किया जाता है। चालक ने यह भी स्वीकार किया कि वह मालिक के निर्देशानुसार वाहन चला रहा है। साथ ही उसके पास ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं है।

प्रशासन को खुली चुनौती?

ग्रामीणों का आरोप है कि बिना रॉयल्टी, बिना नंबर प्लेट और बिना लाइसेंस के चालक खुलेआम रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली सड़कों पर दौड़ा रहे हैं, लेकिन संबंधित विभागों द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। माइनिंग विभाग, परिवहन विभाग और स्थानीय प्रशासन की निष्क्रियता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

निष्कर्ष: यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीण चाहते हैं कि रेत परिवहन करने वाले वाहन गांव के रास्ते का उपयोग न करें और वैध रॉयल्टी के साथ मुख्य सड़क मार्ग का उपयोग किया जाए।