राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो मंगलवार को सिवनी जिले के घंसौर पहुंचे। यहां उन्होंने विभिन्न विभागों के अधिकारियों की बैठक लेकर शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा की। इस दौरान पास्को सहित विभिन्न गंभीर मामलों की प्रगति की जानकारी ली और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे तो धर्मांतरण जैसी घटनाओं को रोका जा सकता है। साथ ही आदिवासी क्षेत्रों में पदस्थ होकर काम छोड़ने वाले डॉक्टरों पर भी सख्त कार्रवाई की बात कही।
घंसौर में आयोजित समीक्षा बैठक में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास तथा पुलिस विभाग के कार्यों की समीक्षा की। मीडिया से चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में पदस्थ कई डॉक्टर अपनी जिम्मेदारियां छोड़कर चले जाते हैं, जिससे स्थानीय लोगों का स्वास्थ्य का अधिकार प्रभावित होता है। ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए वे इस संबंध में राज्य सरकार और राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग को पत्र लिखेंगे तथा दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सामाजिक समस्याओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रियंक कानूनगो, सदस्य, राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग
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