टीकमगढ़ शहर में गंभीर जल संकट गहरा गया है। शहर के 27 वार्डों को पानी उपलब्ध कराने वाले बरीघाट डैम में अब केवल 15 दिन का पानी शेष बचा है। मानसून आने में अभी 20 से 25 दिन का समय बाकी है, जिसके चलते शहर में अब हर तीसरे दिन नल से पानी की आपूर्ति की जा रही है।
बरीघाट डैम का जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। स्थिति यह है कि बड़े वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का इंटेक वाल्व पानी के स्तर से नीचे पहुंच गया है। अब प्लांट को भरने के लिए पनडुब्बी और मोटरों का सहारा लिया जा रहा है।
सोमवार को पूर्व विधायक केके श्रीवास्तव ने अपनी टीम के साथ बरीघाट पहुंचकर जलाशय, ट्रीटमेंट प्लांट और पेयजल व्यवस्था का निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तत्काल समाधान नहीं किया गया, तो शहर को भीषण पेयजल संकट का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि जामनी नदी भी आधी से अधिक सूख चुकी है।
पूर्व विधायक श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश क्षेत्र में लगभग 160 हेक्टेयर (400 एकड़ से अधिक) जमीन पर मूंग और उड़द की खेती की जा रही है, जिसकी सिंचाई बरीघाट के पानी से हो रही है। उन्होंने टीकमगढ़ कलेक्टर से ललितपुर डीएम से समन्वय स्थापित कर जामनी नदी में पानी छोड़े जाने की पहल करने का सुझाव दिया।
नगर पालिका के जल प्रदाय शाखा प्रभारी अनिल श्रीवास्तव ने बताया कि बरीघाट डैम में अभी 15 दिन तक का पानी है, जिसे पनडुब्बी से निकाला जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि लाइन में पांच लीकेज हैं, जिनका सुधार किया जाएगा।
पानी की समस्या को देखते हुए भाजपा जिला अध्यक्ष सरोज राजपूत ने उत्तर प्रदेश के महरौनी विधायक मनोहरलाल पंथ को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने यूपी के ललितपुर जिले में बने डैम से जमडार नदी में पानी छोड़े जाने की मांग की है। यदि मानसून में देरी हुई और यूपी से पानी नहीं छोड़ा गया, तो टीकमगढ़ में पेयजल संकट और गहराने की आशंका है।

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