सीहोर/बुधनी: देवास जिलों में रेलवे लाइन और राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण के बदले वैधानिक पुनर्वास और उचित मुआवजा न मिलने से नाराज आदिवासी समाज और विभिन्न संगठनों का अनिश्चितकालीन धरना बुधवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। ठंड के बावजूद महिलाएं, पुरुष और युवा तहसील कार्यालय परिसर में टेंट लगाकर अपने अधिकारों की मांग पर डटे रहे।
धरनारत आदिवासियों के अनुसार, उन्होंने 12 दिसंबर 2025 को महामहिम राज्यपाल मध्य प्रदेश के नाम आवेदन सौंपा था, जिसमें भारतीय रेलवे और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा भूमि अर्जन, पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन अधिकार अधिनियम 2013 के प्रावधानों का पालन न किए जाने की शिकायत की थी। बावजूद इसके, न तो मुआवजे का भुगतान हुआ और न ही पुनर्वास की प्रक्रिया आगे बढ़ी, जिससे प्रभावित परिवारों में आक्रोश है।
धरने का नेतृत्व: जय जवान युवा शक्ति (जयस) और पीलिकार संगठन के पदाधिकारी इस धरने का नेतृत्व कर रहे हैं। संगठनों का कहना है कि आंदोलन शांतिपूर्ण है, परंतु आदिवासियों और किसानों के वैधानिक अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं होगा।
धरने के दूसरे दिन, मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस की महासचिव श्रीमती कंचन शर्मा ने धरनास्थल का दौरा किया। उन्होंने ठंड में बैठे आदिवासी महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं का कुशलक्षेम जाना और उनकी समस्याएं सुनीं। महिलाओं ने बताया कि भूमि अधिग्रहण के बाद रोज़गार और आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। इस पर कंचन शर्मा ने कहा कि प्रशासन की उदासीनता चिंताजनक है, और यदि शीघ्र ही कार्रवाई नहीं हुई, तो महिला कांग्रेस इस मुद्दे को जिला और राज्य स्तर पर उठाएगी।
आंदोलन जारी रहेगा: धरनारत संगठनों ने स्पष्ट किया है कि जब तक भूमि अर्जन, पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन अधिकार अधिनियम 2013 के तहत उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा और जरूरत पड़ने पर इसे और व्यापक रूप दिया जाएगा।
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