रीवा/त्यौंथर- अमिलकोनी टोक और बरुआ घाट इलाकों में रेत माफियाओं का आतंक चरम पर है। नियमों की अनदेखी कर दिन-रात भारी मशीनों से अवैध रेत उत्खनन किया जा रहा है, जबकि खनिज विभाग, पुलिस, और राजस्व अमला मूकदर्शक बना हुआ है। ऐसा प्रतीत होता है मानो पूरा प्रशासनिक तंत्र रेत माफियाओं के आगे नतमस्तक हो चुका है।
सूत्रों की मानें तो बरुआ टोक में बिना अनुमति के हैवी मशीनों से नदी की छाती चिरी जा रही है। यह गोरखधंधा लंबे समय से जारी है, जिसमें पर्यावरण और शासन के नियमों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। इस अवैध खनन से न केवल नदी के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है, बल्कि शासन को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान भी हो रहा है।
चौंकाने वाली बात यह है कि स्थानीय निवासियों ने कई बार खनिज, राजस्व अधिकारियों और स्थानीय थानों में शिकायत दर्ज करवाई है। यहां तक कि सीएम हेल्पलाइन में भी मामले की रिपोर्ट की गई है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई से बचते नजर आ रहे हैं। इससे कहीं न कहीं मिलीभगत की आहट मिलती है, जिसने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मशीनों से अंधाधुंध उत्खनन, पर्यावरण पर खतरा शासन को राजस्व की हो रही क्षति स्थानीय निवासियों की शिकायतें अनसुनी यह स्थिति न केवल प्रशासन की निष्क्रियता को दर्शाती है, बल्कि यह भी स्पष्ट करती है कि यदि तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो इसके गंभीर दुष्परिणाम हो सकते हैं। प्रशासन को चाहिए कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित और कठोर कार्रवाई करे।
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