त्यौंथर तहसील क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों का अवैध कारोबार तेजी से फैल रहा है, जिससे मरीजों की जान खतरे में पड़ गई है। सिविल अस्पताल त्योंथर से मात्र 100 मीटर की दूरी पर बिना मान्यता, डिग्री या पंजीयन के ये नकली डॉक्टर गंभीर बीमारियों का इलाज करने का दावा कर रहे हैं।
मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़
गलत इंजेक्शन और प्रतिबंधित दवाइयों का उपयोग मनमाने दवा-पर्चे से स्वास्थ्य संकट स्थानीय नागरिकों के अनुसार, कई मरीजों की हालत झोलाछाप डॉक्टरों के इलाज के बाद बिगड़ जाती है और उन्हें जिला या निजी अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है, जिससे परिजन कर्ज में डूब जाते हैं। कुछ मामलों में तो मरीजों की मौत भी हो चुकी है।
स्वास्थ्य विभाग की भूमिका सवालों के घेरे में
बीएमओ डॉ. सुग्रीव दास कोल और उनकी टीम पर गंभीर लापरवाही के आरोप हैं। शिकायतों के बावजूद अवैध क्लीनिकों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है, जिससे झोलाछाप डॉक्टरों के हौसले बुलंद हैं।
जनता की चेतावनी
स्थानीय लोग चेतावनी दे रहे हैं कि अगर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो बड़ा हादसा हो सकता है। सवाल यह उठता है कि मरीजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा—झोलाछाप डॉक्टर या खामोश स्वास्थ्य विभाग?
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