रीवा: त्यौंथर सिविल अस्पताल में इन दिनों अव्यवस्था, लापरवाही और मनमानी का अड्डा बन चुका है। स्थानीय लोगों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि बीएमओ की कथित तानाशाही ने अस्पताल की व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया है। क्षेत्रीय जनता का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारी रीवा में बैठकर केवल कागजों पर मॉनिटरिंग कर रहे हैं, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि अस्पताल भगवान भरोसे चल रहा है और मरीज गंभीर बदहाली का सामना कर रहे हैं।
सबसे गंभीर समस्या डॉक्टरों की कार्यशैली से जुड़ी है। ओपीडी के समय में कई डॉक्टर निजी क्लीनिकों पर मरीजों को देख रहे हैं, जबकि सरकारी अस्पताल में दूर-दराज से आए गरीब मरीज घंटों लाइन में खड़े रहकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं। कई मरीजों को बिना इलाज के ही लौटना पड़ता है। अस्पताल, जो गरीबों के लिए आखिरी उम्मीद होना चाहिए, वहां उपेक्षा और अव्यवस्था का राज दिख रहा है।
इस मामले को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया जा चुका है, लेकिन अब तक न तो कोई जांच हुई है और न ही जिम्मेदारी तय की गई है। इससे साफ संकेत मिलता है कि शिकायतें फाइलों में दबाई जा रही हैं और सिस्टम खुद को बचाने में लगा है।
क्षेत्र में नाराजगी बढ़ती जा रही है और स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो सड़क से लेकर दफ्तर तक बड़ा जनआंदोलन होगा। सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी जनहानि के बाद ही जागेगा?
अस्पताल की व्यवस्था में सुधार की मांग। डॉक्टरों की उपस्थिति सुनिश्चित करने की जरूरत। जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए और जनता की समस्याओं का समाधान करना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके।
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